52 किग्रा फ्लाइवेट वर्ग के फाइनल में पहंचकर अमित पंघल ने बनाया इतिहास

विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता: 52 किग्रा फ्लाइवेट वर्ग के फाइनल में पहंचकर अमित पंघल ने बनाया इतिहास



नयी दिल्ली। भारत के अमित पंघल ने रुस के एकाटेरिनबर्ग में विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता के 52 किग्रा फ्लाइवेट वर्ग के फाइनल में पहुंचकर इतिहास बनाया लेकिन उन्हें शनिवार को खिताबी मुकाबले में हारने के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा। अमित को फाइनल में उजबेकिस्तान के शाखोबिदिन जोइरोव से 0-5 से हार का सामना करना पड़ा और उनका विश्व प्रतियोगिता में भारत की तरफ से पहला स्वर्ण पदक जीतने का सपना टूट गयाअमित इस तरह विश्व प्रतियोगिता में रजत जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष मुक्केबाज बन गए हैं। टर्नामेंट में एक अन्य भारतीय मुक्केबाज मनीष कौशिक को 63 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक मिला था। यह पहला मौका है जब एक विश्व चैंपियनशिप में एक साथ दो भारतीयों ने पदक जीते हैं। इससे पहले वर्ष 2009 में विजेन्दर सिंह, वर्ष 2011 में विकास कृष्णन,2015 में शिवा थापा और 2017 में गौरव बिधूडी ने कांस्य पदक जीते थे। अमित और मनीष ने अपने पदक विजयी प्रदर्शन के साथ ही ओलम्पिक क्वालीफायर्स के लिए भारतीय टीम में अपनार थान सुनिश्चित कर लिया है जो अगले वर्ष फरवरी में चीन में होंगेइन दोनों मुक्केबाजों के वजन वर्गों को चयन ट्रायल से छूट दी जायेगी। अमित ने सेमीफाइनल में शुक्रवार को कजाखिस्तान के साकेन बिबोसिनोव को कड़े मुकाबले में 3-2 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थीलेकिन फाइनल में वह ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता जोइरोव के सामने खास चुनौती पेश नहीं कर सके। भारतीय मुक्केबाज को पहले राउंड में कुछ पंच झेलने पड़े। हालांकि इस राउंड के आखिर में उन्होंने कुछ जबावी प्रहार भी किए। दूसरे राउंड में अमित पिछड़ते नजर आए और ओलंपिक स्वर्ण विजेता से फिर मुकाबला हार गए। पांचों जजों ने एक मत से जोइरोव के पक्ष में अपना फैसला दिया। भारत प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक तो नहीं जीत पाया लेकिन उसने एक रजत और एक कांस्य पदक के साथ एक विश्व चैंपियनशिप में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर डाला।