भारतीय नौसेना में जल्द शामिल होगी स्कॉपीन श्रेणी की दूसरी पनडुब्बी खंदेरी


सीएमडी, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, राकेश आनंद और चीफ ऑफ स्टाफ ऑफिसर (टेक), वेस्टर्न नेवल कमांड, आरएडीएम बी शिवकुमार ने 19 सितंबर को मुम्बई में प्रोजेक्ट 75 की दूसरी स्कॉपीन पनडुब्बी कैंडेरी के लिए स्वीकृति दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।


मुंबई - मझगांव डॉक शिपबिलडर्स लिमिटेड (एमडीएल) देश में रक्षा क्षेत्र की अग्रणी सरकारी जहाज निर्माण कंपनी है जो मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत लगातार देश सेवा में लगी है। एमडीएल ने गुरुवार को मुंबई में भारतीय नौसेना के लिए स्कॉपीन श्रेणी की दूसरी पनडुब्बी खंदेरी की आपूर्ति की। सेना की ओर से पनडुब्बी हासिल करने के दस्तावेज पर एमडीएल के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक राकेश आनंद तथा नौसेना के पश्चिमी कमान के नौसैनिक कमांडर बी सिवकुमार ने एमडीएल के निदेशकों और नौसैनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हसताक्षर किए। खंदेरी को जल्द ही भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। पनडुब्बी खंदेरी का नाम हिन्द महासागर में पाई जाने वाली एक खतरनाक शिकारी मछली-सॉ फिश के नाम पर रखा गया है। पहली खंदेरी पनडुबबी 6 दिसंबर, 1968 को भारतीय नौसेना में शामिल की गई थी। करीब 20 साल से ज्यादा समय तक सेवा देने के बाद इस पनडुब्बी को18 अक्टूबर 1989 को अलविदा कह दिया गया। इसमें बदलाव कर एमडीएल अब इसे भारतीय समुद्री सीमाओं के रक्षक पोत के रूप में इसतेमाल करेगास्कॉपीन का निर्माण वास्तव में एमडीएल के लिए एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि इसका अधिकांश निर्माण कार्य मंझगांव डॉक के ऐसे स्थान पर किया गया जहां पहले से कई निर्माण कार्य चल रहे थे जिसकी वजह से वहां जगह की काफी तंगी हो गई थी। हालांकि, इन सभी चुनौतियों से निबटते हुए गुणवत्ता में किसी भी प्रकार का समझौता किए बिना एमडीएल द्वारा पनडुब्बी का निर्माण सफलतापूर्वक कर लिया गया। स्कॉपीन में प्रयुक्त तकनीक ने पनडुब्बी की बेहतर विशेषताओं को सुनिश्चित किया है। स्कॉपीन श्रेणी की पनडुब्बियां आमतौर पर किसी भी आधुनिक पनडुब्बी द्वारा किए जाने वाले विविध कार्यों को बड़ी निपुणता के साथ कर सकती हैं। खंदेरी की आपूर्ति के साथ, भारत ने पनडुब्बी निर्माण करने वाले राष्ट्र के रूप में अपनी स्थति को और मजबूत बनाया है और एमडीएल ने क्राइसिल द्वारा व्यावसायिक जहाज और युद्धपोत तथा जहाज मरम्मत उद्योग पर मार्च 2018 में जारी रिपोर्ट के अनुसार भारतीय नौसेना की जरुरतों के हिसाब से युद्धपोत निर्माण के क्षेत्र में अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप प्रदर्शन किया है। स्कॉीन श्रेणी की तीसरी पनडुब्बी करंज का निर्माण 31 जनवरी 2018 को शुरु किया गया था। यह पनडुब्बी अभी समुद्री परीक्षण के अपने कई चरण से गुजर रही है। स्कॉीन श्रेणी की चौथी पनडुबबी-वेला का हाल ही में मई 2019 में जलावतरण किया था। इसे समुद्री परीक्षण के लिए तैयार किया जा रहा है जबकि दो अन्य स्कॉीन पनडुब्बियां- वागीर और वागशीर निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं। स्कॉीन पनडुब्बियों के निर्माण में यह प्रगति रक्षा उत्पादन विभाग के सक्रीय सहयोग के बिना संभव नहीं थीयहां इस बात का जिक्र भी जरूरी है कि एमडीएल द्वारा 1992 और 1994 में निर्मित दो एसएसके पनडुब्बियां 25 साल पूरा हो जाने के बाद भी अभी तक भारतीय नौसेना में अपनी सेवा दे रही हैं। यह एमडीएल की दक्षता और कौशल का प्रमाण हैं। एमडीएल स्वेदशी तकनीक से युद्धपोतों के निर्माण में हमेशा से अग्रणी रहा है। इसने आईएनएस गोदावरी और लिएंडर जैसे युद्धपोतों के अलावा मिसाइल नौकाओं, दिलली और कोलकाता श्रेणी के युद्धपोत,एसएसके और सकॉपीन श्रेणी की पनडुब्बियों का निर्माण किया है। समय रहते भविष्य की चुनौतियों को पहचानते हुए एमडीएल ने अपने आधुनिकीकरण का व्यापक कार्य पूरा किया है। इसके तहत मौजूदा समय एमडीएल में आठ युद्धपोतों, छह पनडुब्बियों का निर्माण चल रहा है।