मालाबार 2019 त्रिपक्षीय समुद्रीय अभ्यास जापानी तट के समीप होगा


मलाबार 2019 एमपीआरए(समुद्री गश्त और टोही विमान) ऑपरेशन्स के प्रारंभ समारोह में कप्तान रवि कुमार, सीओ आईएएस 312 इंडियन नेवी और कैप्टन मैथ्यू रदरफोर्ड, कमांडर टास्क फोर्स 72 यूएस नेवी के साथ आरएडीएम कोजी कनिशिमा।


भारत, जापान और अमरीका की नौसेनाओं के बीच त्रिपक्षीय समुद्रीय अभ्यास मालाबार के 23वें संस्करण का आयोजन 26 सितंबर से 4 अक्टूबर, 2019 तक जापान के तट के समीप होने जा रहा है। इस अभ्यास में भाग लेने के लिए स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और निर्मित किये गए भारतीय नौसेना के 2 फ्रंटलाइन पोत, बहु-उद्देश्यीय निर्देशित मिसाइल युद्धपोत सहयाद्री तथा एएसडब्ल्यू कॉर्वेट किलतान पर सवार होकर रियर एडमिरल सूरज बैरी, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग पूर्वी बेड़ा, बुधवार को सासेबो पहुंचे। युद्धपोतों के अलावा लंबी दूरी का सामुद्रिक गश्ती लड़ाकू विमान 'पी81' भी इस अभ्यास के लिए जापान पहुंचा है। अमरीकी नौसेना का प्रतिनिधित्व लॉस एंजेलिस-क्लास अटैक क मरीन यूएसएस मैक्कैम्बेल और लंबी दूरी के सामुद्रिक गश्ती लड़ाकू विमान 'पी8ए' कर रहे हैं। जेएमएसडीएफ(जापान मैरीटाइम सेल्फ डिफेन्स फ़ोर्स) अपने इजुमो क्लास हेलिकॉप्टर डेस्ट्रॉयर जेएस कागा, निर्देशित मिसाइल विध्वंसक जेएस सामीदारे और छोकाई तथा लंबी दूरी का सामुद्रिक गश्ती लड़ाकू विमान 'पी1' के साथ भाग ले रही है। मालाबार 2019 भारत-जापान-अमरीका नौसेना सहयोग को और मजबूती प्रदान करेगा तथा साझा मूल्यों और सिद्धांतों पर आधारित पारस्परिकता में वृद्धि करेगा। इस अभ्यास में सतह, उप-सतह और वायु क्षेत्रों में जटिल सामुद्रिक ऑपरेशन शामिल होंगे तथा पनडुब्बी-रोधी युद्ध, विमान-रोधी और पनडुब्बी-रोधी फायरिंग, मैरीटाइम इन्टर्डिक्शन ऑपरेशन्स (एमआईओ) पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इनके अलावा इस अभ्यास के दौरान विजिट बोर्ड सर्च एंड सीजर (वीबीएसएस) और समुद्र में सामरिक परि श्य आधारित अभ्यास पर भी ध्यान दिया जाएगा। इन परिचालनों के अलावा, साझेदार नौसेनाएं आधिकारिक प्रोटोकॉल दौरे, सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट एक्सचेंज (एसएमईई) सहित व्यवसायिक संपर्क, एक-दूसरे के पोत पर दौरा, खेल प्रतियोगिताएं और सामाजिक कार्यक्रम भी संचालित करेंगी। ये आयोजन हार्बर चरण के दौरान आयोजित किये जाएंगे। अभ्यास में भारतीय नौसेना के पोत और लड़ाकू विमान तीनों देशों के बीच सामुद्रिक संबंधों को महत्वपूर्ण रूप से मजबूती प्रदान करेंगे और क्षेत्र की सुरक्षा और थायित्व में योगदान देंगे।