रक्षा मंत्री ने भारतीय तटरक्षक पोत ‘वराह' का जलावतरण किया

> एल एंड टी शिपबिल्डिंग ने भारत की समुद्र आधारित परिसंपत्तियों के उत्पादन और रखरखाव में निभाई है महत्वपूर्ण भूमिका। 


> निजी कंपनियों से उत्कृष्ट मानदंडों वाले नौसेना उपकरणों को विकसित करने का किया अनुरोध।


> संचालन विशिष्ट आर्थिक जोन से लेकर कन्याकुमारी तक को कवर करने वाले पश्चिमी तट पर थत न्यू मंगलोर बंदरगाह से किया जाएगा।



चेन्नई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा का साझा लक्ष्य प्राप्त करने के लिए तटीय सुरक्षा में जुटी सभी एजेंसियों और हितधारकों के बीच सक्रिय सामंजस्य स्थापित करने का आह्वान किया है। राजनाथ सिंह बुधवार को चेन्नई में भारतीय तटरक्षक पोत (आईसीजीएस) इंडियन कोस्ट गार्ड शिप वराह' के जलावतरण समारोह में उपथित लोगों को संबोधित कर रहे थे। रक्षा मंत्री ने विशवास जताया कि आईसीजीएस वराह' समद्री आतंकवाद के खतरों. तसकरी और समद्री कानून को लागू करने के मार्ग में द चुनौतियों से निपटने में संलगन तटरक्षक बेडे को और अधिक मजबूत करेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आईसीजीएस वराह' से भारतीय तटरक्षक की निगरानी एवं गश्ती क्षमताए बढ़ेगा और हमार समुद्र के प्रहरी' के रूप में उसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। रक्षा मंत्री ने क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (सागर)' से संबंधित प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक जिम्मेदार समुद्री ताकत होने के नाते समुद्र भी सरकार की अत्यंत महत्वपूर्ण नीतिगत प्राथमिकताओं में शामिल है। रक्षा मंत्री ने आईसीजीएस वराह को उद्योग जगत के साथ गठबंधन और 'मेक इन इंडिया' का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जिसके तहत लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) शिपबिल्डिंग ने हमारी समद्र आधारित परिसंपत्तियों के उतपादन और रख-रखाव में अतयंत महतवपर्ण भमिका निभाई है। राजनाथ सिंह ने कहा कि वराह' नाम पुराण से लिया गया है, जो भगवान विष्णु क अवतार थे और जिनहोंने धरती माता की रक्षा के लिए जंगली सअर का रूप धारण कर अपने दांतों के जरिए पथवी को समद्र से सरक्षित बाहर निकाला था। उनहोंने कहा कि यह लीजेंड हमें धरती माता की रक्षा करने से जुड़े बलिदान एवं मुक्ति के सिद्धांत का स्मरण कराती हैरक्षा मंत्री ने पर्याप्त संख्या में वाणिज्यिक जहाजों और युद्ध पोतों दोनों ही तरह की विश्वस्तरीय परिसंपत्तियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि समुद्री क्षेत्र में वर्चस्व संभव हो सके। उन्होंने कहा कि एक मजबूत एवं जीवंत जहाज निर्माण उद्योग को सुनिश्चित किए बगैर पर्याप्त संख्या में इनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना संभव नहीं है। रक्षा मंत्री ने कहा कि विशाल बेड़ों को खरीदा नहीं जा सकता, उनका निर्माण सुनिश्चित करना होगा। जहाज निर्माण प्रौद्योगिकी के स्वदेशीकरण में निजी कंपनियों द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना करते हुए राजनाथ सिंह ने उनसे उत्कृष्ट मानदंडों वाले नौसेना उपकरणों को विकसित करने का अनुरोध किया।



रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने युद्धपोत-निर्माण के विशिष्ट क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए निजी यार्डों सहित अन्य शिपयार्डों को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने इस बारे में मिली प्रतिक्रिया को अत्यंत उत्साहवर्धक बताया। रक्षा मंत्री ने कहा कि विश्व भर में ऐसे कुछ ही देश हैं जिनके पास फास्ट अटैक क्राफ्ट से लेकर विमान वाहक युद्धपोतों का निर्माण करने की क्षमता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि 'मेक इन इंडिया' के सरकारी विजन पर अमल करते हुए एक मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में भारतीय नौसेना स्वदेशीकरण योजना 2015-2030' तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि दस्तावेज का उद्देशय अगले 15 वर्षों के दौरान विभिन्न उपकरणों और प्रणालियों का स्वदेशी विकास सुनिश्चित करना है। रक्षा मंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान' की तर्ज पर चलाए जा रहे भारतीय तटरक्षक के स्वच्छ सागर अभियान' की सराहना करते हुए कहा कि स्वच्छ समुद्र भारत की आर्थिक समृद्धि और स्थरता के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आईसीजीएस वराह' प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों को ले जाने में सक्षम है। उन्होंने आईसीजी की विभिन्न पहलों की भी सराहना की। इनमें सामुदायिक संवाद कार्यक्रमों और मछुआरों के लिए सुरक्षा जागरूकता अभियानों के साथ-साथ उन्हें राष्ट्रीय प्रयोजन के लिए आंख-कान' बनाए जाने की पहल भी शामिल हैं। इससे पहले, आईसीजीएस वराह' को तटरक्षक बेड़े में शामिल किया गया। अत्याधुनिक अपतटीय गश्ती पोत आईसीजीएस 'वराह' उन सात पोतों में चौथा पोत है, जिन्हें एलएंडटी द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। यह अत्याधुनिक नौवहन, संचार सेंसर और मशीनरी से लैस है। इसका संचालन विशिष्ट आर्थिक जोन से लेकर कन्याकुमारी तक को कवर करने वाले पश्चिमी तट परथित न्यू मंगलोर बंदरगाह से किया जाएगा। आईसीजीएस 'वराह' हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा स्वदेश में विकसित उन्नत हल्के हेलिकॉप्टर का संचालन करने में सक्षम है। यह पोत अत्यंत तेज गति से चलने वाली नौकाओं, चिकित्सा सुविधाओं और आधुनिक निगरानी प्रणालियों से लैस है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आईसीजीएस वराह' से भ्रमण भी किया। आईसीजी के महानिदेशक श्री के नटराजन ने श्री राजनाथ सिंह को इस पोत की विशेषताओं से अवगत कराया।