प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों की स्थिति को बेहतर करना प्राथमिकता होगी: सौरभ गांगुली


मुंबई। भारतीय क्रिकेट के महाराजा कहे जाने वाले बंगाल टाइगर सौरभ गांगुली का भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का नया अध्यक्ष बनना तय हो गया है। गांगुली ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष पद के लिए सोमवार को नामांकन दाखिल किया। इस प्रतिष्ठित पद के लिए उनका निर्विरोध चुना जाना तय है। बोर्ड चुनावों के लिए नामांकन भरने की आज आखिरी तारीख थी। पूर्व भारतीय कप्तान गांगुली के खिलाफ अध्यक्ष पद के लिए कोई और नामांकन नहीं है, इसलिए उनका बीसीसीआई का नया बॉस बनना तय है। बीसीसीआई चुनाव 23 अक्तूबर को होंगे और इस चुनाव के लिए नामांकन करने की आखिरी तारीख 14 अक्तूबर थी। गांगुली ने आईपीएल के पूर्व कमिश्नर राजीव शुक्ला के साथ यहां नामांकन दाखिल किया। गांगुली ने 400 से ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय मैचों में भारत का प्रतिन्धित्व किया और वह पांच वर्षों तक भारत के कप्तान भी रहे। मौजूदा समय में वह बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं और इस पद पर वह लगातार दो बार चुने जा चुके हैं।47 वर्षीय गांगुली ने नामांकन दाखिल करने के बाद संवाददातों से कहा कि निश्चित तौर पर यह बहुत अच्छा अहसास है, क्योंकि वह देश के लिए खेले और कप्तान भी रहे। अध्यक्ष पद की दौड़ में बृजेश पटेल को पछाड़ने के बाद अब दादा इस पद के अकेले उम्मीदवार रह गए हैं। हालांकि बीसीसीआई नियमों के अनुसार अनिवार्य कूलिंग ऑफ अवधि के कारण उन्हें जुलाई 2020 में पद छोड़ना होगा। गांगुली के पास अध्यक्ष पद पर ज्यादा समय नहीं रहेगा। बीसीसीआई के नए संविधान के अनुसार किसी पदाधिकारी को तीन साल की कूलिंग ऑफ अवधि में जाना पड़ेगा यदि उसने किसी राज्य संघ या बीसीसीआई स्तर पर लगातार छह वर्ष पूरे कर लिए हों। गांगुली बंगाल क्रिकेट संघ के पदाधिकारी हैं जहां वह हाल ही में अध्यक्ष चुने गए थे। उनके पास कूलिंग ऑफ अवधि आने तक 10 महीने बाकी हैं। देश के सबसे सफल कप्तानों में से एक गांगुली ने कहा, “निर्विरोध चुना जाना ही बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। यह विश्व क्रिकेट का सबसे बड़ा संगठन है और जिम्मेदारी तो है ही, चाहे आप निर्विरोध चुने गए हों या नहीं। भारत क्रिकेट की महाशक्ति है तो यह चुनौती भी बड़ी होगी।” गांगुली ने साथ ही कहा कि उन्होंने कभी भी बोर्ड के अध्यक्ष बनने का लालसा प्रकट नहीं थी और सदस्यों द्वारा चुने जाने पर वह इस पद को अपनाने को राजी हुए हैं। गांगुली ने संवादादताओं से कहा कि पिछले तीन वर्षों में बीसीसीआई में जो खराब हालात थे उन्हें सुधारना और प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों की स्थिति को बेहतर करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा, “यह हमारा दायित्व है कि सभी तरह की चीजें सही तरीके से हों। मेरे लिए हालांकि प्राथमिकता प्रथम श्रेणी क्रिकेट खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मुहैया करना होगी। साथ ही कोशिश होगी कि सभी चीजें अपनी जगह पर रहें।”इस बीच राजीव शुक्ला ने बताया कि चुनावों के लिए नामांकन भरने के लिए आज आखिरी तारीख थी। अधिकतर सदस्यों ने आठ पदों पर उन लोगों को समर्थन दिया है जिनके नामांकन पत्र सोमवार को दाखिल किए गए, उसमें गांगुली का भी नाम है। गांगुली ने कहा, “मैंने इस पद के लिए कभी भी अपनी इच्छा जाहिर नहीं की थी। मौजूदा हालात और लोगों ने मुझे यहां तक पहुंचाया है। मुझे पता नहीं था कि मैं अध्यक्ष बनूंगा। मुझे बताया गया कि मैं अध्यक्ष हूं और मेरी टीम यह रहेगी। मुझे सदस्यों ने चुना है। सदस्य ही हमेशा चुनते हैं। उन्होंने मुझे चुना तो मैंने हां कहा।”गांगुली ने खिलाड़ियों के प्रशासन में आने की बात पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “यह अच्छी बात है कि खिलाड़ी अब प्रशासन का हिस्सा हैं। पहले भी हुआ करते थे लेकिन अब संख्या ज्यादा हो गई है जो खेल के लिए अच्छी बात है।” सचिव के लिए बीसीसीआई में नौ साल का अनुभव रखने वाले जयेश शाह, उपाध्यक्ष पद के लिए उत्तराखंड़ के महेश वर्मा का नाम है। संयुक्त सचिव के लिए केरल से जयेश जॉर्ज का नाम है जबकि कोषाध्यक्ष के लिए अरुण धूमल का नाम है। इसके अलावा बृजेश पटेल को आईपीएल अध्यक्ष चुना जाना तय है। जय शाह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बेटे हैं जबकि अरुण धूमल बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और मौजूदा केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के भाई हैं। पूर्व भारतीय कोच अंशुमान गायकवाड इस बीच कीर्ति आज़ाद को परास्त कर बीसीसीआई की नौ सदस्यीय सर्वोच परिषद में आईसीए के पुरुष प्रतिनिधि चुन लिए गए जबकि शांता रंगास्वामी पहले ही निर्विरोध महिला आईसीए प्रतिनिधि चुनी जा चुकी हैं। उल्लेखनीय है कि सभी संघों ने ये फैसले सर्वसम्मति से लिए हैं जिससे ये उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए जाएंगे।नए पदाधिकारियों को 23 अक्टूबर को चुने जाने के साथ प्रशासकों की समिति के 33 महीने के कार्यकाल का समापन हो जाएगा जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को चलाने के लिए नियुक्त किया था।


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