गैर-अल्कोहलिक फैटी लीवर रोग जैसी उभरती समस्याओं का आयुर्वेदिक समाधान अब होगा संभव

सीसीआरएएस ने आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में अनुसंधान और विकास तथा प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग के लिए जेएनयू और आईएलबीएस के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए।




नई दिल्ली (का ० उ ० सम्पादन)भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के तहत केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) ने बीते गुरूवार को आयुष और रक्षा मंत्री श्रीपद नाइक की उपस्थिति में आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में अनुसंधान और विकास तथा प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग के लिए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस अवसर पर श्री नाइक ने आयुर्वेद की वैश्विक स्वीकृति के लिए अंतःविषयी दृष्टिकोणों के माध्यम से आयुर्वेद में ट्रांसलेशनल रिसर्च की आवश्यकता पर जोर दिया और आयुर्वेद जैसी भारतीय ज्ञान प्रणाली की समझ की सराहना की और सीसीआरएएस, जेएनयू और आईएलबीएस के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, जेएनयू के कुलपति प्रो एम जगदीश कुमार और आईएलबीएस के डीन (अनुसंधान)  डॉ विजय कुमार भी उपस्थित थे। इन अत्याधुनिक संस्थानों के साथ अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग तथा बहुविध  अध्ययनों के माध्यम से आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों पर ठोस प्रमाण तैयार होंगे और गैर-अल्कोहलिक फैटी लीवर रोग (एनएएफएलडी) जैसी उभरती स्वास्थ्य समस्याओं का आयुर्वेदिक समाधान संभव होगा।