प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल में जनसभाओं को संबोधित किया

प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल में जनसभाओं को संबोधित किया



>ये दीदी का दमनचक्र ही है कि सिंडिकेट फल-फूल रहा है, लेकिन टीचरों को, कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए सरकार पैसा न होने का बहाना करती है: प्रधानमंत्री मोदी


>दीदी आपने विश्वासघात किया है, आज जो पश्चिम बंगाल में गुस्सा है वो आपके विश्वासघात का है और इस विश्वासघात की कीमत यहां का नौजवान लेकर रहेगा, दीदी आपकी जमीन खिसक चुकी है: पीएम मोदी


>अंग्रेजों की तरह दीदी भी 'भाग कोरो, शासोन कोरो(divide and rule) की नीति पर चल रही हैं, जबकि हमारी नीति है 'ऐक कोरो, शेबा कोरो' यानि 'सबका साथ-सबका विकास': प्रधानमंत्री


प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर और बैरकपुर में जनसभाओं को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा कह रही है कि आतंकवाद और नक्सलवाद से देश को मुक्ति दिलानी है, लेकिन महामिलावटी कह रहे हैं कि मोदी को हटाना है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अंग्रेजों की तरह दीदी भी 'भाग कोरो, शासोन कोरो' (divide and rule) की नीति पर चल रही हैं। जबकि हमारी नीति है 'ऐक कोरो, शेबा कोरो' यानि 'सबका साथ सबका विकास' ।


SRIRAMPUR



आज सुबह से पश्चिम बंगाल से जिस तरह की खबरें आ रही हैं, वो बता रही हैं कि दीदी का गुस्सा इस समय सातवें आसमान पर है। मैं उन्हें यही कहूंगा- ममता दीदी, लोकतंत्र ने ही आपको ये पद दिया। अब लोकतंत्र को स्वीकारिए, आपने पश्चिम बंगाल के लोगों को धोखा दिया, लेकिन अब लोकतंत्र को धोखा मत दीजिए। आज जो भी खुद को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बता रहा है, उनका एकमात्र एजेंडा है- मोदी को हटाना। भाजपा-एनडीए का कहना है कि भ्रष्टाचार हटाएंगे, महामिलावटी कह रहे हैं मोदी को हटाओ। भाजपा कह रही है कि आतंकवाद और नक्सलवाद से देश को मुक्ति दिलानी है, लेकिन ये कह रहे हैं कि मोदी को हटाना है। भाजपा कह रही है कि 2022 तक किसान की आय दोगुनी करेंगे, महामिलावटी कह रहे हैं कि मोदी को हटाओ। भाजपा कह रही है कि 2022 तक हर गरीब के पास अपना पक्का घर होगा, लेकिन महामिलावटी कहते हैं- मोदी को हटाओ। भाजपा कह रही है कि किसान, दुकानदार, मजदूर, सबको 60 वर्ष बाद नियमित पेंशन देंगे, लेकिन ये कह रहे हैं कि चौकीदार को हटाना है। भाजपा, यहां के हर गरीब को आयुष्मान भारत के तहत 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा देना चाहती है, लेकिन इस पर भी कहा जा रहा है कि मोदी को हटाओ। भाजपा कह रही है कि मुसलिम बहनों को तीन तलाक से बचाना है, उसके खिलाफ कानून बनाना है, तो भी ये लोग कह रहे हैं कि मोदी हटाओ। एक सुरक्षित देश में ही विकास की बात की जा सकती है। आज हम सुरक्षा की बात करते हैं, शहीदों की बात करते हैं, राष्ट्रवाद की बात करते हैं तो दीदी और सारे महामिलावटी भड़क जाते हैं। यहां पश्चिम बंगाल में तो इस बार दीदी सारी सीमाएं पार करने पर तुली हुई हैं। टीएमसी के गुंडे, लोगों को वोट डालने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा के कार्यकर्ताओं पर हमला कर रहे हैं। भाजपा के नेताओं को प्रचार नहीं करने दे रहे। दीदी आपने विश्वासघात किया है, आज जो पश्चिम बंगाल में गुस्सा है वो आपके विश्वासघात का है और इस विश्वासघात की कीमत यहां का नौजवान लेकर रहेगा। दीदी आपकी जमीन खिसक चुकी है। दीदी ने घोषणा की है अब वो मुझे बंगाल की मिट्टी-पत्थरों से बना रसगुल्ला खिलाना चाहती हैं। बंगाल की मिट्टी का रसगुल्ला मतलब, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, चैतन्य महाप्रभु, जगदीश चंद्र बोस, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महापुरुषों की चरण रज। महापुरुषों के पैरों की धूल, वो माटी जिन पर उनके पैर पड़े, वो माटी जिन्होंने देश को बनाने वाले ऐसे महान व्यक्तित्वों को बनाया, मुझे अब उस माटी का प्रसाद मिलेगा तो मेरा जीवन धन्य हो जाएगा। भारत की राजनीति में आज तक 4 प्रकार के दल और पॉलिटिकल क चर देखे गए हैंपहला नामपंथी, दूसरा वामपंथी, तीसरा दाम-दमन पंथी और चौथा- विकास पंथी। नामपंथी यानि जो सिर्फ अपने वंशवादी नेता का नाम जपे, नेता में योग्यता हो न हो, उसे राजा-महाराजा मानकर उसका ही गुणगान करे। वामपंथी यानि जो नकारी जा चुकी विदेशी विचारधारा को भारत पर थोपने की कोशिश करे, भारतीयता का अपमान करे। दाम-दमन पंथी यानि जो धन और बाहुबल की ताकत पर सत्ता पर कब्जा करे और लोगों को ही अपना गलाम बनाने की कोशिश करे। भारत में चौथा राजनीतिक क चर है विकास पंथी है। वो विकास पंथ जो भाजपा की संस्कृति है। जिसके लिए दल से बड़ा देश है। जिसके लिए देश का विकास, देश के लोगों का विकास ही सर्वोपरि है। आज पश्चिम बंगाल में जो सत्ता में हैं, जो तृणमूल वाले हैं, उसकी विचारधारा पूरी तरह से दाम और दमनपंथी है। दाम की बात करें तो किसी को घर बनाना हैतो टीएमसी के दादाओं से परमिशन चाहिए। घर या ज़मीन बेचनी है तो टोलाबाज़ी होती है। किसी को अपना दफ्तर बनाना है, तो सिंडिकेट की इजाजत चाहिए। परमिशन से एडमिशन तक दाम ही दाम। यहां दमन की थति तो ये हैकि विरोधी विचारधारा वालों को फांसी पर लटका दिया जाता है। दीदी तो चाहती हैं कि पुलिस प्रशासन उनके लिए एक प्राइवेट सिक्योरिटी और प्राइवेट पॉलिटिकल एजेंसी बनकर काम करे। ये दीदी का दमनचक्र ही है कि सरस्वती पूजा, काली पूजा, मनाने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है। रामनवमी के जुलूस हमेशा डर के साए में निकलते हैं। ये दीदी का दमनचक्र ही है कि सिंडिकेट फल-फूल रहा है, लेकिन टीचरों को, कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए सरकार पैसा न होने का बहाना करती है। दीदी के दिल में क्या है? असल में दिल्ली तो बहाना है, यहां पर भतीजे को जमाना है। बुआ और भतीजे का ये खेल पश्चिम बंगाल समझ चुका है। चिटफंड के नाम पर जिन गरीब परिवारों को जीवन खोना पड़ा है, उनके आंसुओं का जवाब इस बार जनता देने वाली है।


BARRACKPORE



पश्चिम बंगाल में जूट सेक्टर को भी नई शक्ति प्रदान करने की कोशिश कर रहे हैं। हाल में हमने जूट के समर्थन मूल्य में भी बढ़ोतरी की है। बाहर से आने वाले जूट पर ड्यूटी भी बढ़ाई है। केंद्र सरकार ने पतली प्लास्टिक को धीरे-धीरे पूरी तरह से बंद करने का भी फैसला लिया है। इसका भी बहुत बड़ा लाभ जूट इंडस्ट्री को होगा, जूट के थैलों का प्रचलन और बढ़ेगा। अपनी वोटभक्ति के लिए जो लोग राष्ट्रभक्ति की भावनाओं को नकारने लगें, वंदेमातरम् और भारत माता की जय से पहले सौ बार सोचने लगें, ऐसे लोगों से बंगाल के लोगों को सावधान रहना है। वोट बैंक की और वंशवाद की ही जय-जयकार करने की मानसिकता रही है, जिसकी वजह से इतने वर्षों तक आज़ादी के नायकों को भुला दिया गया। अब भाजपा-एनडीए की सरकार वंशवाद की छाया से हमारे वीर-वीरांगनाओं को बाहर निकालने का काम कर रही है। मेरे लिए वो पल अविस्मरणीय हैं, जब आजाद हिंद फौज सरकार के 75 वर्ष पूरे होने पर लाल किले पर तिरंगा फहराने का सौभाग्य मिला था। नेताजी और आज़ाद हिंद फौज का योगदान भावी पीढ़ी तक पहुंचे, इसके लिए अब लाल किले में ही क्रांति मंदिर का भी निर्माण किया गया है। आजादी के बाद, इतिहास में पहली बार आजाद हिंद फौज के सेनानी, गणतंत्र दिवस की परेड का हिस्सा बने। हम सभी का सौभाग्य का था कि उम्र के इस पड़ाव में भी वो हमें आशीर्वाद देने आए। इससे पहले भी दशकों तक हर साल गणतंत्र दिवस मनाया गया, परेड होती रही, लेकिन आजाद हिंद फौज के उन वीरों को याद करने की सुध किसी ने नहीं ली। क्या इन लोगों ने अंग्रेजों की गोलियां नहीं खाईं थीं, क्या उन्होंने अत्याचार नहीं सहे थे, जेल नहीं गए थे। लेकिन परिवारवाद और वंशवाद की राजनीति करने वालों ने इनके त्याग, इनके बलिदान को भुला दिया। आज यही दल हमारे सपूतों के शौर्य पर भी सवाल उठाते हैंजब हमारे वीरसर्जिकल स्ट्राइक करते हैं, तो ये पाकिस्तान की बातों पर भरोसा करते हैं। जो अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए आतंक के सरपरस्तों की झूठी खबरों को यहां बढ़ावा देते हैं, उन पर देश भरोसा कर सकता है क्या? जो जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों का खुलकर समर्थन करते हों, कहते हों कि उनका बंदूक उठाना गलत नहीं, उन पर देश भरोसा कर सकता है क्या? जो लोग ये मानते हों कि फौज में लोग दो वक्त की रोटी की मजबूरी में भर्ती होते हैं, जो लोग हमारे वीरों की देशभक्ति पर सवाल उठाते हैं, उन पर देश भरोसा कर सकता है क्या? अंग्रेजों की तरह दीदी भी 'भाग कोरो, शासोन कोरो' (divide and rule) की नीति पर चल रही हैं। जबकि हमारी नीति है 'ऐक कोरो, शेबा कोरो' यानि सबका साथ- सबका विकास'। पहले वाम मोर्चा ने और अब दीदी के दाम और दमन मोर्चा ने जूट की फैक्ट्रियों में ताला लगा दिया है। ट्रेड यूनियनों की गुंडागर्दी, सिंडिकेट के वसूली गिरोह ने जूट उद्योगों और जूट किसान को बर्बादी के कगार पर लाकर छोड़ दिया है। सबको रसोई गैस, सबको बिजली कनेक्शन, सबको शौचालय, हर गरीब परिवार को सस्ता राशन, ये आपका जीवन आसान बनाने के लिए है। ये दिल्ली से आपके लिए भेजा जाता है लेकिन यहां पर ममता दीदी, इन योजनाओं पर अपना स्टीकर लगा देती हैंकेंद्र सरकार ने बेटियों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाए हैं। बेटियों की तस्करी से जुड़े कानून में बहुत ही सख्त प्रावधान किए गए हैं, लेकिन यहां की सरकार उसको ठीक से लागू ही नहीं करती। इसी तरह, रेप जैसे जघन्य अपराध के लिए, फांसी तक की सज़ा आपके इस चौकीदार ने की है। लेकिन यहां की सरकार केस दर्ज करने में और उनको अदालत में पहुंचाने के लिए गंभीरता नहीं दिखाती।


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