वैद्यनाथ धाम की पवित्र भूमि पर मुख्यमंत्री कृषि आर्शीवाद योजना का उपराष्ट्रपति ने किया शुभारंभ

» कृषक पारंपरिक तकनीक अपना कर भूजल संरक्षण में दें सहयोग


» उन्नत बीज उपलब्ध कराने हेतु सरकार द्वारा बीज ग्राम का गठन सराहनीय पहल


» किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करने के लिए राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री कृषि आर्शीवाद योजना का किया गया शुभारंभ



राँची - उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने शनिवार को कहा कि “भारत सरकार द्वारा किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करने का संकल्प लिया गया है। इसी क्रम में सरकार 23 अनाजो के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लगातार बढ़ा रही है तथा हमारे वनवासी भाइयों के लिये वन उत्पादों पर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जा रहा है।” वे आज यहां झारखंड राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के किसानों की आमदनी बढ़ाने हेतु मुख्यमंत्री कृषि आर्शीवाद योजना का शुभारंभ कर रहे थे। इस योजना के तहत राज्य के सभी लघु एवं सीमांत किसान जिनके पास अधिकतम 5 एकड़ तक कृषि योग्य जमीन होगी उन्हें 5000/- रूपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से सहायता अनुदान दिया जायेगा, जिससे उनके ऋण पर निर्भरता में भी कमी आयेगी। यह राशि दो किस्तों में दी जायेगी। इस योजना से सभी योग्य किसानों को प्रति वर्ष कम से कम 5000/- रूपये तथा अधिकतम 25000/- रूपये मिलेंगे जो कि DBT के माध्यम से सीधा किसानों के बैंक खाते में भेजी जायेगी। इस वर्ष राज्य के लगभग 35 लाख किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। जिसके प्रथम चरण में लगभग 10 लाख किसानों के बीच प्रथम किस्त के रूप में राशि 380.00 करोड़ रूपये का वितरण किया गया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने जल संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि “जल जैसे प्राकृतिक संसाधन का संचयन, संरक्षण आवश्यक है। इसके लिए वर्षा जल संरक्षण का व्यापक अभियान चलाया जाना चाहिए, जिससे धरती का जल स्तर बढ़े।” उन्होंने आगाह किया कि भूजल के अनियंत्रित दोहन से भूजल का स्तर लगातार नीचे गिर रहा है। जिससे सिंचाई की लागत बढ़ रही है। उपराष्ट्रपति ने अपेक्षा की कि किसान अपने पारंपरिक तकनीक अपना कर भूजल संरक्षण में सहयोग देंगे।



उपराष्ट्रपति, श्री एम वेंकैया नायडू ने 10 अगस्त, 2019 को रांची, झारखंड में, कृषि आर्शीवाद योजना लॉन्च करने के बाद मुख्यमंत्री कृषि लाभ योजना के लाभार्थियों के साथ बातचीत की। झारखंड के राज्यपाल, श्रीमतीद्रौपदी मुर्मू, झारखंड के मुख्यमंत्री, श्री रघुबर दास, राज्य सभा के उपाध्यक्ष, श्री हरिवंश नारायण सिंह, कृषि, झारखंड के मंत्री, श्री रंध्री कुमार सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी दिखाई दिए। 


 


उपराष्ट्रपति के संबोधन का पाठ इस प्रकार है:


"प्रिय भाईयो एवं बहनो सभी को नमस्कार एवं समस्त झारखंडवासियों को जोहार


प्रदेश के किसान भाइयों के लाभ के लिए मुख्यमंत्री कषि आर्शीवाद योजना के शभारंभ के अवसर पर, सावन के इस पवित्र माह में वैद्यनाथ धाम की इस पवित्र भूमि पर, आप सभी के बीच शामिल होकर अत्यंत प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूं। वर्षा ऋतु प्रकृति के नवसर्जन का समय है। जीवनदायी जल से तृप्त हो कर धरती हमे धनधान्य का आर्शीवाद देती है। इस अवसर पर आप सभी धरा-सेवी किसान भाइयों के बीच आकर धन्य महसूस कर रहा हूं।



मित्रों, झारखंड कृषि प्रधान राज्य है। मुझे यह जानकर खुशी है कि झारखंड सरकार द्वारा किसानों के कल्याण एवं कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में गंभीर प्रयास किये जा रहे हैं। मुझे बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा कृषि को बढ़ावा देने हेतु जल संग्रहण एवं जल संचयन की योजना चलायी जा रही है, तालाब का जीर्णोद्धार, डीप बोरिंग एवं परकोलेशन टैंक का निर्माण किया रहा है, जिससे बढ़े क्षेत्रफल में अतिरिक्त सिंचाई सृजित हो सकेगी। मित्रों, मैं आग्रह करूंगा कि जल जैसे प्राकृतिक संसाधन का संचयन, संरक्षण आवश्यक है। इसके लिए वर्षा जल संरक्षण का व्यापक अभियान चलाया जाना चाहिए, जिससे धरती का जल स्तर बढ़ेयह चिंता का विषय है कि भूजल के अनियंत्रित दोहन से भूजल का स्तर लगातार नीचे गिर रहा है। जिससे सिंचाई की लागत बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' का संदेश दिया है। मैं अपेक्षा करूंगा कि हमारे कृषक भाई अपने पारंपरिक तकनीक अपना कर भूजल संरक्षण में सहयोग देंगे। मुझे जानकर हर्ष है कि कृषि के यांत्रिकीकरण का कार्य भी हो रहा है। उन्नत बीज उपलब्ध कराने हेतु सरकार द्वारा बीज ग्राम का गठन सराहनीय पहल है। मुझे यह जानकर संतोष है कि कृषकों को योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके इसके लिए सिंगल विंडो सेंटर की व्यब था की गयी है। कृषि अनिश्चितताओं से भरा क्षेत्र है। अत: विपरीत परिस्थतियों में फसल की क्षति की भरपाई हेतु फसल बीमा योजना भी चलाई जा रही है। साथ ही किसानों की लागत कम करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किसानों को दिये जा रहे अल्पकालीन कृषि ऋण पर अतिरिक्त 3 प्रतिशत ब्याज माफ करने हेतु इंट्रेस्ट सबवेंशन की योजना भी चलाई जा रही है। राज्य सरकार की ये योजनाएं स्वागत योग्य हैं। आप जानते ही हैं कि भारत सरकार द्वारा किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करने का संकल्प लिया गया है। इसी क्रम में सरकार 23 अनाजो के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लगातार बढ़ा रही है। हमारे वनवासी भाइयों के लिये वन उत्पादों पर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जा रहा है। मुझे खुशी है कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के संकल्प को पूरा करने के लिए राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री कृषि आशीवाद योजना का शनिवार को शुभारंभ किया जा रहा है। इस योजना में राज्य के सभी लघु एवं सीमांत किसान जिनके पास अधिकतम 5 एकड़ तक कृषि योग्य जमीन होगी उन्हें 5000/- रूपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से सहायता अनुदान दिया जायेगा। जिन किसानों के पास कुल कृषि योग्य भूमि 0-1 एकड़ तक होगी, उन्हें 5000/- रूपये आर्थिक सहायता के रूप में दिये जायेंगे। मुझे विश्वास है कि इस राशि का उपयोग किसानों द्वारा कृषि कार्य हेतु किया जायेगा, जिससे उनके ऋण पर निर्भरता में भी कमी आयेगीमुझे यह भी बताया गया है कि यह राशि दो किस्तों में दी जायेगी। इस योजना से सभी योग्य किसानों को प्रति वर्ष कम से कम 5000/- रूपये तथा अधिकतम 25000/- रूपये मिलेंगे और यह राशि किसानों को DBT के माध्यम से सीधा उनके बैंक खाते में भेजी जायेगी। मित्रों, विगत दशकों में देश में कृषि योग्य भू क्षेत्र में तो वृद्धि हुई है लेकिन यह चिंता का विषय है कि होल्डिंग्स का आकार कम हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार आगामी कुछ वर्षों में लगभग 90% होल्डिंग्स 1 हैक्टेयर से कम क्षेत्रफल की होगीआज कृषि पर आधारित लगभग 6.25 करोड़ परिवार 1 हैक्टेयर से कम की होल्डिंग्स पर जिदंगी बसर कर रहे हैं। होल्डिंग्स के आकार के साथ, ऐसे परिवारों की आमदनी भी कम होती है। लेकिन छोटी होल्डिंग्स से ही अधिकतम पैदावार प्राप्त करने के लिए, किसानों द्वारा प्रयोग किये गये बीजों, खाद और रसायनों से लागत बढ़ती जाती है। इसी कारण अन्य देशों के मुकाबले हमारे देश में प्रति हैक्टेयर उत्पादकता भी कम है। ऐसे में सरकार द्वारा दी गयी यह सहायता सर्वथा स्वागत योग्य है। मुझे हर्ष है कि राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष राज्य के लगभग 35 लाख किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। जिसके प्रथम चरण में आज लगभग 10 लाख किसानों के बीच प्रथम किस्त के रूप में राशि 380.00 करोड़ रूपये का वितरण किया जा रहा है। मुझे विश्वास है कि यह योजना किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य में सहायक साबित होगी। मैं पुन: राज्य सरकार को इस योजना की शुरुआत करने के लिए बधाई देता हूं तथा सभी किसानों को शुभकामना देता हूंइस अवसर पर मैं किसान बंधुओं से आग्रह करूंगा कि कृषि आधारित सूक्ष्म उद्यम या शिल्प या अन्य ग्रामीण उद्योगों को भी लगाएं, इससे न केवल आमदनी बढ़ेगी और ग्रामीण उद्यमिता बढ़ेगी बल्कि कृषि उत्पादकता भी बढ़ेगी। आपके विकास से ही राज्य का विकास संभव हैमैं पुन: इस योजना को शुरु करने हेतु राज्य सरकार को बधाई देता हूं। जय हिंद"