राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे प्रधानमंत्री मोदी


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 सितंबर, 2019 को मथुरा में खुरपका और मुंहपका की बीमारी तथा ब्रुसेलोसिस के लिए राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम को भी लॉन्च करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी पशु विज्ञान एवं आरोग्य मेले में शामिल होंगे तथा बाबूगढ़ सेक्स सीमेन सुविधा और देश के सभी 687 जिलों के कृषि विज्ञान केंद्रों में कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे। कार्यशाला का विषय है- टीकाकरण और रोग नियंत्रण, कृत्रिम गर्भाधान एवं उत्पादकता आदिखुरपका और मुंहपका रोग तथा ब्रुसेलोसिस के लिए राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम का शत प्रतिशत वित्त पोषण केंद्र सरकार करेगी। इस मद में 2019 से 2024 के लिए 12,652 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य टीकाकरण के माध्यम से खुरपका और मुंहपका रोग तथा ब्रुसेलोसिस को 2025 तक नियंत्रित करना तथा 2030 तक पूरी तरह समाप्त करना है। खुरपका और मुँहपका रोग (एफएमडी-सीपी) के भारत में गंभीर सामाजिक आर्थिक निहितार्थ हैं। इसलिए देश में एफएमडी करने और ओआई/एफएओ के द्वारा निर्धारित पीसीपी को नियंत्रण करने और नियंत्रण पाथवे3 पीसीपी (एफएमडी) के अनुसार रोग के कारण आर्थिक हानि को न्यूनतम करने के संबंध में देशभर में टीकाकरण के माध्यम से एफएमडी को नियंत्रण करने के लिए राष्ट्र स्तरीय मिशन मोड प्रयास किये जा रहे हैं तथा खुरपका और मुंहपका रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एफएमडी-सीपी) के अंतर्गत कठोर जैव-सुरक्षा व्यब था कार्यान्वित की जा रही है। सघन नियंत्रण कार्यक्रम 10 वीं पंचवर्षीय योजना (2013-14 में) से प्रांरभिक रूपसे आठ राज्यों और 6 संघ राज्य क्षेत्रों को कवर करते हुए चयनित 54 जिलों में कार्या व्यनधीन था। आगे 2010-11 के दौरान 167 जिलों को कवर करने और बाद में राज थान और 2013 -14 में उत्तर प्रदेश के शेष जिलों, 2014-15 के दौरान बिहार को कवर करने के लिए विस्तारित किया गया था। इस समय कार्यक्रम 2017-18 से संपूर्ण देश में कार्यान्वित किया जा रहा है। एफएमडी नियंत्रण के बहु- लाभो और तत्पश्चात् क्षेत्रों /देश से रोग के उन्मूलन और लघु धारक पशुधन किसानों के संबंध में आजीविका में सुधार, आर्थिक खाद्य और पोषकीय सुरक्षा के लाभ में इसकी महत्वा पर विचार करते हुए, सरकार तदुनसार कार्यक्रम के कार्यान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। सधन कार्यक्रम घटक के प्रमख क्रियाकलाप छमाही अंतराल पर सभी पात्र गोपश और भैसों का टीकाकरण करना प्रचार और जन जागरण अभियाप है जिसमें योजना के कार्यान्वयन हेतु सरकारी अधिकारियों का उन्मुखीकरण लक्षित पशुओं की पहचान, रैंडम आधार पर पशुआबादी की सीरम- निगरानी/मानिटरिंग, व्यापक टीकाकरण, शीत कैबीनेट और एफएमडी टीके की खरीद टीके के एकत्रित नमूनों का उनकी गुणवत्ता के लिए रैंडमली मूल्याकंन प्रकोपके मामले मे वायरस के प्रकार और स्थायी संगरोध चेक-पोस्ट के माध्यम से बिना टीके वाले क्षेत्रों से पशुओं के आवागमन की रिकॉर्डिंग विनियमन शामिल है। टीकाकरण कार्यक्रम की प्रभावशीलता का मूल्याकंन करने के लिए टीकाकरण से पूर्व और टीकाकरण के 21-30 दिनों के पश्चात् 10 गोंपशु और 10 भैंस (रैंडम आधार पर) के सीरम के नमूनों को टीकाकरण के प्रत्येक चक्र के लिए प्रत्येक जिले से रैंडम आधार पर 10 गांवों से एकत्रित किया जायेगा और सीरोटाइप विशिष्ट एंटीबांडी को निष्क्रिय करने के स्तर के लिए जांच की जायेगी। टीकाकरणक के प्रति चक्र प्रति जिले कुल 400 सीरम के नमूने एकत्रित करना जारी रहेगा और परीक्षण किया जायेगा। पूर्व चेतावनी प्रणाली थापित करने के संबंध में राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकार को एफएमडी की निगरानी प्रांरभ करने की आवश्यकता है। किसी प्रकोप के मामले में यह तुरंत सूचित करेगी और राज्य/संघ राज्य क्षेत्र पशुओं में संक्रमित और संक्रामक रोगों की रोकथाम और नियंत्रण अधिनियम, 20019 के प्रावधानों के अनुसार रोग का नियंत्रण और नियंत्रण और (रोकथाम कर सकेंगें)।


• रोग के महामारी विज्ञान को जानने के लिए आगे और पीछे के संबंधों के साथ प्रत्येक और हर प्रकोप की जांच की जायेगी।


• बीमार पशुओं का अलगाव और रोकथाम तथा उनका उपचार।


• वायरस के संचरण को रोकने के लिए सभी संदिग्ध पशुओं की कवर करने हेतु प्रभावित गांव/क्षेत्र के आस-पास (510 कि.मी) की परिधि में चक्रीय टीकाकरण जिसमें भेंड, बकरी, सुअर आदि शामिल है।


• संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए संक्रमित पशुओं के आवागमन पर प्रतिबंध/नियंत्रण• विसंक्रमीणकरण और जैव सुरक्षा उपायो का कार्यान्वन।


• प्रकोप के क्षेत्रों में पर्याप्त जन जागरण अभियान


पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन विभाग (डीएडीएफ), भारत सरकार नियंत्रण कार्यक्रम के कार्यान्वयन, टीके कीक आपूति की व्यब था करने अन्य लॉजिस्टिक समर्थन शीत श्रृखंला और वित्तीय सहायोग विस्तारित करने के लिए 60:40 (भारत सरकार: राज्य) और पूर्वोत्तर तथा हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 के आधार पर नीति बनाता है। संघ राज्य क्षेत्रों का कार्यक्रम के कार्यान्वन के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है। जिन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में एफएमडी-सीपी संचालित है वहां टीकाकरण को समयबद्ध रूप से प्रारंभ करने रिकार्ड रखने और एफएमडी-सीपी के तहत अनेक क्रियाकलापों को प्रांरभ करने के लिए श्रमशक्ति प्रदान की जाती है। खुरपका मुंहपका रोग निदेशालय (डीएफएमडी), भारतीय कृषि अनुसधान परिषद (आईसीएआर) के अधीन एक प्रयोगशाला एफएमडी नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत टीका लगाये गये पशुओं की प्रतिरक्षा प्रणाली को जानने के लिए एफएमडी नियंत्रण कार्यक्रम के अधीन विस्तृत सीरम - मॉनिटरिंग करती है। डीएडीएफ कार्यक्रम की मॉनिटरिंग करता है और सुगम कार्यान्वयन सुनिश्चित करता है।