स्पोर्ट्सवियर ब्रांड एडिडास ने नयी एथलेटिक्स वीआरसीटी जैकेट लांच किए


नयी दिल्ली - एशियाई खेलों में हेप्टाथलन जैसी मुश्किल प्रतिस्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास बनाने वाली एथलीट स्वप्ना बर्मन खेलों में नौकरी करने आयी थी लेकिन खेलों ने ही उनका जीवन ऐसा बदल डाला कि वह स्टार बन गयीं। स्वप्ना ने महिला मुक्केबाज सिमरनजीत कौर और स्कैश खिलाड़ी दीपिका पल्लीकल के साथ शुक्रवार को यहां स्पोर्ट्सवियर ब्रांड एडिडास के नयी एथलेटिक्स फ्रेंचाइजी वीआरसीटी जैकेट लांच किए जाने के अवसर पर अपने जीवन की कहानी को साझा किया और बताया कि किस तरह वह खेलों की ऊचांइयों तक पहुंची। स्वप्ना के साथ दीपिका और सिमरन ने भी अपने जीवन की कहानी को साझा किया। हाल में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हुई हेटाथलन एथलीट स्वप्ना ने कहा, "मेरी कहानी को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। मैंने जीवन में एक लंबा सफर तय किया हैएशियाई खेलों में स्वर्ण पदक और फिर अर्जुन पुरस्कार मेरे जीवन के गौरवपूर्ण क्षण हैं। मेरी जीवन यात्रा बहुत मुश्किल और सबसे अलग थीलेकिन मेरे परिवार ने हमेशा मेरा साथ दिया।" अपने पैरों में छह उंगलियों के कारण मुश्किल हालात से गुजरने वाली स्वप्ना ने कहा, "मैं तो खेलों में नौकरी करने आयी थी ताकि मैं अपने परिवार की मदद कर सकू। लेकिन खेलों ने मेरा जीवन ही बदल डाला। एडिडास ने मुझे सहारा दिया और मुझे ऐसे विशेष जूते बनाकर दिए जिसने मेरा खेल करियर ही बदल डाला। सब बोलते थे कि मैं हेटाथलन में हिस्सा नहीं ले पाउंगी। लेकिन मैंने ठान लिया था कि मैं खेलों में उतरूंगी और देश के लिए पदक जीतूंगी। मुझे खुशी है कि मैंने यह कर दिखाया।"एशियाई मुक्केबाजी प्रतियोगिता में रजत जीतने वाली सिमरन ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां और बड़ी बहन को देते हुए कहा कि उन्होंने ही उन्हें मुक्केबाजी में आने के लिए प्रेरित किया। उन्होने कहा, “मेरी मां कहती थी, बेटियों को अपने दम पर आगे बढ़ना चाहिए ताकि उन्हें किसी से कुछ मांगना ना पड़े। मुझे मुक्केबाजी से प्यार हो गया और मैंने फिर देश के लिए पदक जीते। हालांकि एक समय हमारे पास ग्लब्स खरीदने के पैसे नहीं होते थे लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ बदल गया।” सिमरन ने कहा, “मेरे पिता मेरा समर्थन नहीं करते थे। लेकिन जब मैंने पदक जीतने शुरु किए तो वह भी मेरा समर्थन करने लगे। मुक्केबाजी में लड़कियां ज्यादा नहीं थी इसलिए मुझे शुरु में लड़कों के साथ लड़ना पड़ता था। मेरी आदर्श मेरी बड़ी बहन हैं जो अक्सर टीवी पर दिखाई दिया करती थीं। मैंने भी ठान लिया था कि मुझे उनकी तरह बनना है। आपको सफल होने के लिए खुद पर विश्वास रखना हो ता है और इसी विश्वास ने मुझे सफल बनाया।” स्क्वैश खिलाड़ी दीपिका पल्लीकल ने भी अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को दिया। इस लांच के अवसर पर एडिडास के इन एंबेसेडरों के साथ एडिडास इंडिया के सीनियर मार्केटिंग निदेशक मनीष साप्रा भी मौजूद थे। जिन्होंने कहा कि यह जैकेट इन एथलीटों में और इसे पहनने वालों में उनके व्यक्तित्व को लेकर नया उत्साह भर देगा।


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