एनएचएसआरसी का नया नाम अब डब्ल्यूएचओ सहयोग केंद्र

> एनएचएसआरसी ने नवोन्मेषों के मूल्यांकन में एक सहयोगी केंद्र के रूप में डब्ल्यू एचओ की सहायता की है।



नई दिल्ली। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सहयोग से राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (एनएचएसआरसी) का नाम बदलकर उसे प्राथमिकता वाले चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी नीति के लिए डब्ल्यू एचओ सहयोग केंद्र नाम देने की औपचारिक घोषणा की है। एनएचएसआरसी के स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी प्रखंड को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत नई प्रौद्योगिकियां प्राप्त करने के लिए तकनीकी विनिर्देश तैयार करने का आदेश दिया गया है। इनमें चिकित्सा उपकरणों के रख-रखाव और प्रबंधन के लिए मसौदा नीतियां तैयार करना, स्वास्थ्य उत्पाद नवोन्मेष का मूल्यांकन करना, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी आकलन कराना और नैदानिक पहल, राष्ट्रीय डायलेसिस कार्यक्रम, अन्य प्रौद्योगिकी संबंधी अन्य गहन सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को सहायता प्रदान करना है। इससे पहले एनएचएसआरसी ने ऑक्सीजन संकेन्द्रक और पुन: होश में लाने वाले जैसे चिकित्सा उपकरणों के लिए तकनीकी विशेष निर्देशों लागू करने और नवोन्मेष उपकरणों के बारे में डबलयूएचओ की सूचनाओं के विसतत विवरण के लिए नवोनमेषों के मूलयांकन में एक सहयोगी केंद्र के रूप में डब्ल्यू एचओ की सहायता की है। इस वर्ष डबलयूएचओ के देश में स्थत कार्यालय, एनएचएसआरसी ने मंत्रालय की मुफ्त नैदानिक पहल के लिए एक दिशा निर्देश दस्तावेज तैयार किया है ताकि किफायती नैदानिक सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुंच के एजेंडा को और मजबूत बनाया जा सकेएनएचएसआरसी ब्लड प्रेशर नापने के उपकरणों, कैंसर व दिल की बीमारियों के लिए विट्रो डायग्नोस्टिक और उपकरणों के तकनीकी विशेष निर्देशों को तैयार करने के लिए डब्ल्यूएचओ के साथ कार्य कर रहा है। साथ ही भविष्य में किए जाने वाले सहयोग में अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण के कार्य और चिकित्सा उपकरणों के लिए पारिभाषिक शब्दावली शामिल है, जो किफायती स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी तक पहुंच को बेहतर बनाएगीस्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के संबंध में इस तरह के वैश्विक सहयोग से वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी सुधार, अनुसंधान व विकास के साथ-साथ यह सुनिश्चित होगा कि नवीन प्रौद्योगिकी स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सहयोगपूर्ण भूमिका निभा सकती है और इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य के उद्देश्यों तक पहुंचा जा सकता है।