मंत्रिमंडल को एनएचएम के ईपीसी (एम्पॉवर प्रोग्राम कमिटी) एवं एमएसजी (मिशन स्टीयरिंग ग्रुप) के निर्णयों से अवगत कराया गया 

> 15000 के लक्ष्य के प्रति 17149 आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का संचालन किया गया।
> कुल 1, 81,267 स्वास्थ्य कर्मियों को एनसीडी (नॉन कम्युनिकेबल डिसीसेस) पर किया गया प्रशिक्षित।
> आशा कार्यकर्ताओं की दिनचर्या और आवर्ती प्रोत्साहन 1000 रूपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 2000 रूपये प्रतिमाह किया गया।
> राष्ट्रीय क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनटीसीपी) को काफी मजबूत और सघन किया गया है।



नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल को राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन (एनएचएम) के तहत प्रगति तथा राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन (एनएचएम) के अधिकृत कार्यक्रम समिति (ईपीसी) एवं मिशन संचालन समूह (एमएसजी) के निर्णयों से अवगत कराया गया है।



मुख्य विशेषताएं:
एनआरएचएम/ एनएचएम की शुरूआत के बाद से मातृ मृत्यु दर (एमएमआर), अंडर फाइव मॉर्टेलिटी रेट (यू5एमआर) और आईएमआर में गिरावट आई है। गिरावट की वर्तमान दर पर, भारत को अपने एसडीजी लक्ष्य (एमएमआर-70, यू5एमआर-25) को नियत वर्ष से पहले यानी 2030 तक पहुंचने में सक्षम होना चाहिए। 2017 की तुलना में 2013 में मलेरिया के मामलों और मौतों को कम करना, विश्‍व में भारत की सबसे बड़ी सफलता थी, जो 2013 में क्रमश: 49.09% और 50.52% तक घट गई है। संशोधित राष्ट्रीय क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनटीसीपी) को काफी मजबूत और सघन किया गया है। सभी जिलों में कुल 1,180 सीबीएनएएटी (कार्ट्रिज बेस्ड नुक्लेइक एसिड एम्पलीफिकेशन टेस्ट) मशीनें लगाई गई हैं, जो दवा प्रतिरोधी टीबी सहित टीबी के लिए तेजी से और सटीक निदान प्रदान करती हैं। इसके परिणामस्वरूप पिछले वर्ष की तुलना में सीबीएनएएटी का तीन गुना अधिक इस्‍तेमाल हुआ है। गहन प्रयासों के कारण, एक वर्ष में नए मामलों की पहचान में 16% वृद्धि हुई है। सार्वभौमिक दवा संवेदनशील मामलों में भी 54% की वृद्धि हुई। उपचार की अवधि के लिए सभी टीबी रोगियों को बेडाक्विलीन और डेलमिनायड और पोषण सहायता की नई दवा की खुराक पूरे देश में दी गई है। 2018-19 में, 52744 एबी-एचडब्ल्यूसी (आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) को मंजूरी दी गई, जिसके तहत 15000 के लक्ष्य के प्रति 17149 एचडब्ल्यूसी का संचालन किया गया। 2018-19 के दौरान, आशा, एमपीएचडब्ल्यू (मल्टी पर्पस हेल्थ वर्कर), स्टाफ नर्स और पीएचसी-एमओ (प्राइमरी हेल्थ केयर - मेडिकल अफसर) सहित कुल 1, 81,267 स्वास्थ्य कर्मियों को एनसीडी (नॉन कम्युनिकेबल डिसीसेस) पर प्रशिक्षित किया गया। राज्यों ने एचडब्ल्यूसी के संचालन के लिए गतिविधियां शुरू की हैं। नए टीकों के बीच, टेटनस और वयस्क डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन ने टेटनस टॉक्सॉइड (टीटी) वैक्सीन की जगह ले ली, ताकि 2018 में सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत वयस्कों में डिप्थीरिया प्रतिरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। 2018 में, 17 अतिरिक्त राज्यों में मीजल्स-रूबेला (एमआर) टीकाकरण अभियान चलाया गया, जिसमें मार्च 2019 तक 30.50 करोड़ बच्चों को शामिल किया गया। 2018-19 के दौरान, रोटावायरस वैक्सीन (आरवीवी) अतिरिक्त दो राज्यों में शुरू किया गया था। आज तक, सभी राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश आरवीवी में शामिल हैं। 2018-19 के दौरान, न्यूमोकोकल कंजुगेटेड वैक्सीन (पीसीवी) का विस्तार मध्‍य प्रदेश, हरियाणा तथा बिहार, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के शेष जिलों में किया गया था। आशा कार्यकर्ताओं की दिनचर्या और आवर्ती प्रोत्साहन 1000 रूपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 2000 रूपये प्रतिमाह किया गया। आशा और आशा सुविधा प्रदाताओं को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (भारत सरकार द्वारा 330 रुपये का प्रीमियम) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा (भारत सरकार द्वारा समर्थित 12 रुपये का प्रीमियम) सुविधा प्रदान की गई। पोषण अभियान के तहत अप्रैल 2018 में, एनीमिया-मुक्त भारत (एएमबी) अभियान शुरू किया गया था। एचडब्ल्यूसी में तब्दील स्वास्थ्य उपकेंद्रों के लिए एकीकृत धनराशि को 20,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया। होम चाइल्ड केयर फॉर यंग चाइल्ड (एचबीवाईसी) कार्यक्रम पोषण अभियान के तहत शुरू किया गया था। टीबी/कुष्ठ रोग/मलेरिया/काला-अजार/लसीका-फाइलेरिया/मोतियाबिंद में रोग के उन्‍मूलन के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों/जिलों को पुरस्कृत करने की योजना को मंजूरी दी गई थी। यह जिलों / राज्यों को राष्ट्रीय प्रमाणन से पहले रोग-मुक्त के रूप में प्रमाणित करेगा और ओडीएफ जिलों और राज्यों के समान राज्यों और जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा। राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम को ए, बी, सी और ई और हेपेटाइटिस की रोकथाम, प्रबंधन और उपचार के लिए अनुमोदित किया गया था और रोलआउट शुरू किया गया था। इससे हेपेटाइटिस के अनुमानित 5 करोड़ रोगियों को लाभ होगा।


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