स्वास्थ्य सेवा सरकार का है शीर्ष एजेंडा: डॉ हर्षवर्धन

  • डॉ हर्षवर्धन ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद के 13वें सम्मेलन का उद्घाटन किया।

  • राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के संकल्प के बिना स्वास्थ्य सेवा कारगर नहीं हो सकती: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण सचिव

  • डॉ हर्षवर्धन ने सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) कार्यक्रम लॉन्च किया।



नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया है कि वे अपने राज्य के बजट का कम से कम 8 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवा में खर्च करने के लिए बढ़ाए ताकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के 2.5 प्रतिशत जीडीपी लक्ष्य को हासिल किया जा सके। डॉ हर्षवर्धन गुरुवार को केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद के 13वें सम्मेलन का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेतर् में हमने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं विशेषकर भारत पोलियों मुक्त हो गया है ऐसा हमारे सामूहिक प्रयासों के कारण हुआ है। इस अवसर पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे, डॉ वी के पॉल, सदस्य (स्वास्थ्य), नीति आयोग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण सचिव प्रीति सूदन और 13 राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री उपस्थित थे।



सीसीएचएफडब्लू के 13वें कॉन्फ्रेंस में डॉ हर्षवर्धन ने अपने सहयोगी राज्य मंत्री अश्विनी चौबे के साथ नेशनल डायबिटीज & डायबिटिक रेटिनोपैथी सर्वे इंडिया 2015-19 पर एक रिपोर्ट जारी की।


डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद की बैठक का उद्देश्य देश की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर सहमति कायम करना है। देश की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में आयुष्मान भारत के माध्यम से सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी), तपेदिक रोक की समाप्ति और चिकित्सा संरचना को मजबूत बनाने जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन प्राथमिकताओं को राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में खर्च बढ़ाकर सामूहिक रूप से हासिल किया जा सकता है। ताकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के 2025 तक जीडीपी के 2.5 प्रतिशत स्वास्थ्य खर्च के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। उन्होंने कहा कि पहली बार सरकार स्वास्थ्य सेवा के प्रति संकल्पबद्ध है और स्वास्थ्य सेवा सरकार के शीर्ष एजेंडा में है। उन्होंने कहा कि हाल में सम्मपन संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में प्रधानमंत्री के संबोधन से ये स्पष्ट हुआ है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य सेवा के चार स्तंभों पर बल दिया जिसमें सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, मिशन मोड कार्यक्रम, गुणवत्ता संपन्न तथा पहुंच योग्य किफायती स्वास्थ्य सेवा और पर्याप्त बुनियादी संरचना शामिल है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य को प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में सामाजिक आंदोलन बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ईट राइट एंड फिट इंडिया आंदोलन को समन्वित तरीके से राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा चलाया जाना चाहिए ताकि स्वस्थ्य और मजबूत भारत सुनिश्चित हो सके। उन्होंने उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री से जो कि राज्य के वित्त मंत्री भी हैं, राज्य के स्वास्थ्य बजट में वृद्धि करने का आग्रह किया ताकि अनुसरण करने के लिए उदाहरण कायम किया जा सके। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण सचिव सुश्री प्रीति सूदन ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय कारगर, किफायती, गुणवत्ता संपन्न और पहुंच योग्य स्वास्थ्य सेवा के प्रति समर्पित है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के संकल्प के बिना स्वास्थ्य सेवा कारगर नहीं हो सकती। नीति आयोग के सदस्य डॉ विनोद के पॉल ने सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए प्राथमिकता वाले दो क्षेत्रों पर बल देने को कहा इनमें केंद्र तथा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा स्वास्थ्य बजटों में वृद्धि करना तथा स्वास्थ्य के लिए बुनियादी ढांचा में वृद्धि शामिल है।उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य बजट में वृद्धि के बारे में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में व्यक्त किए गए संकल्प राज्यों के योगदान के बिना हासिल नहीं किये जा सकते।



इस मौके पर विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ डॉ हर्षवर्धन ने सुरक्षित मातृत्व आश्वासन अभियान सुमन पर एक पुस्तिका और उसकी वेबसाइट का लोकार्पण किया। अब मातृत्व व नवजात की सुरक्षा से जुड़ी मौजूदा सभी योजनाएं सुमन के अधीन आ जाएंगी।


उद्घाटन सत्र में डॉ हर्षवर्धन ने अन्य मंत्रियों के साथ सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) कार्यक्रम लॉन्च किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्रालय के जीजीएचस डॉ संजय त्यागी, विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य सचिव तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, आईसीएमआर, नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न विकास साझेदारों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।