स्वास्थ्य मंत्री उ प्र ने किया फाइलेरिया उन्मूलन ट्रिपल ड्रग थेरेपी का शुभारम्भ

 


कानपुर (का ० उ ० सम्पादन)। फाइलेरिया एक प्रकार के कृमि परजीवी द्वारा होने वाली बीमारी है। यह एक विशेष प्रकार के मच्छर द्वारा फैलती है। यह हाथ, पैर, स्तन य अंडकोष के सूजन(हाइड्रोसील), पेशाब में सफ़ेद रंग के द्रव के स्त्राव (काईलूरिया), लम्बे समय से सूखी खासी आना आदि के रूप में दिखाई देता है। जन सामान्य को फाइलेरिया से मुक्ति प्रदान किये जाने के परिपेक्ष में प्रदेश के 19 जनपदों में एमडीए/आईडीए 2019 का कार्यक्रम 25 नवंबर से लेकर 10 दिसंबर तक किया जाना निर्धारित किया गया है , जिसमें पूर्व वर्षों से भिन्न ट्रिपल ड्रग थेरेपी के तहत अल्बेंडाज़ोल एवं डीईसी (आयु वर्ग के अनुसार) के साथ साथ आइवरमेक्टिन (लम्बाई के अनुसार) दवा का सेवन प्रत्येक व्यक्ति को कराया जाना है। प्रदेश के 11 चयनित जिलों में आई डी ए कार्यक्रम क्रमशः प्रयागराज,कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, मिर्ज़ापुर, प्रतापगढ़, चंदौली, फतेहपुर एवं हरदोई तथा 8 जनपदों में एम डी ए कार्यक्रम क्रमशः औरैया, इटावा, फर्रुखाबाद, ग़ाज़ीपुर, कन्नौज, कौशाम्बी, सुल्तानपुर तथा रहे बरेली में चलाया जाएगा। जनपद कानपुर नगर में यह कार्यक्रम सात ब्लाकों में 25 नवंबर से 12 दिसंबर तक चलाया जाएगा। प्रत्येक कार्य दिवस में 25 घर (125 - 130 जनसंख्या) को दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके क्रम में गाँव अथवा शहरी क्षेत्र की जनसंख्या को 10 दिन में दवा के सेवन से आच्छादित कराने के लिए मइक्रोप्लान बनाया गया है।  सभी ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर को ब्लॉक स्टार पर प्रशिक्षित कर दिया गया है। कार्यक्रम की मॉनिटरिंग जिला स्तरीय अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी / उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा की जायेगी। 


फाइलेरिया (हाथीपांव) उन्मूलन हेतु "ट्रिपल ड्रग थेरेपी" अभियान को सफल बनाने हेतु मा0 मंत्री, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मातृ एवं शिशु कल्याण उत्तर प्रदेश जय प्रताप सिंह एवं मा0 मंत्री औद्योगिक विकास उत्तर प्रदेश सतीश महाना के कर कमलों द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरसौल ,कानपुर नगर में कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मा0 मंत्री  चिकित्सा,स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण,  उत्तर प्रदेश  जय प्रताप सिंह  ने अपने संबोधन में कहा कि जब हमारा देश 1947 में आजाद हुआ तब पूरे देश की आबादी लगभग 33 से 35 करोड़ थी और आज लगभग 1. 30 अरब है और हमारे प्रदेश की आबादी  लगभग  22 करोड़ है। कानपुर में लगभग 40 लाख है बढ़ती आबादी के हिसाब से कोई प्लानिंग न होने के कारण सभी बड़े शहरों व सभी कस्बों में  बेतरतीप मकान बना दिए गए, जैसा जीवन यापन का तरीका होना चाहिए वह नहीं हो पाया और मानव जीवन बीमारियों के घर में परिवर्तित हो गया| आज लोग मोबाइल, टीवी,फ्रिज आदि उपकरणों का प्रयोग ज्यादा कर रहे है, जिससे बीमारियां ज्यादा फैल रही हैं। मा0 प्रधानमंत्री जी ने प्रत्येक क्षेत्र में साफ-सफाई रखने के लिए कह रहे हैं।  उनके व मा0 मुख्यमंत्री जी के मार्गनिर्देशन में  संचारी रोगों से लड़ने के लिए नियोजन बनाकर कार्ययोजनाएं  बना कर लागू की गई। लोगों को जागरूक किया जा रहा है, इसी के तहत सरकार अनेक विभाग को जोड़ते हुए बीमारियों से लड़ने के लिए प्लान बना कर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ज्यादा बीमारियां मच्छरों से हो रही हैं उन से कैसे बचा जाए? आपको बताया गया है साफ स्वच्छ रहें, कूलर, नालियों, गमला आदि में पानी इकट्ठा न होने पाए। प्रत्येक स्थान साफ रहना चाहिए जिससे मच्छर न उत्पन्न हो  और प्लास्टिक का प्रयोग न किया जाए| इस वर्ष देर से बरसात होने के कारण डेंगू व वायरल बुखार की बीमारी ज्यादा फैली है इस बीमारियों से लड़ने के लिए अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसी तरह फाइलेरिया का अभियान शुरू किया जा रहा है। फाइलेरिया का मच्छर काटता है उसका डंक 3 साल तक बना रहता है और बाद में हाथी पांव का रूप ले लेता है| 2 वर्ष के नीचे बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर रोंगो पीड़ित लोग फाइलेरिया कि दवा न लें और 2 वर्ष के ऊपर तक सभी लोगों को शत प्रतिशत टेबलेट लेना होगा।  इसमें सभी का सहयोग करना होगा तभी इस बीमारी को जड़ से समाप्त किया जा सकता है| फाइलेरिया की दवा *खाली पेट* कदापि नहीं लेनी है।मा0 मंन्त्री गण जनता के बीच में उपस्थित रह कर  फाइलेरिया की दवा ले, इससे जनता के बीच में सकारात्मक संदेश जाएगा।


मा0 मंत्री औद्योगिक विकास उत्तर प्रदेश सतीश महाना ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सावधानी से अच्छे से जीवन यापन करना चाहिए यदि सावधानी पहले से ही रखेंगे तो कोई भी बीमारी नहीं होने पाएगी। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया का मच्छर गंदगी से उत्पन्न होता है। प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक होना चाहिए और साफ -स्वच्छ रहना चाहिये। स्वच्छ भारत होगा तो समृद्ध भारत होगा| जीवन को समृद्ध बनाने के लिए हमें स्वच्छता को जीवन में उतारना होगा। अभी कानपुर में व पूरे प्रदेश में डेंगू का मच्छर नुकसान पहुंचा रहा है, उससे बचने के लिए काफी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया रोग में शत प्रतिशत सभी लोगों को दवा लेनी होगी इसमें कोई भी व्यक्ति छूटना नहीं चाहिए। एक जमाना था सभी लोग जहां पाते थे कूड़ा फेंक देते हैं, लेकिन आज जब बड़े लोग कूड़ा फेंकते हैं तो छोटे बच्चे भी उसे रोक देते हैं इसलिए सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाए।  सरकार की जितनी योजनाएं हैं प्रत्येक व्यक्ति को लाभ मिलना चाहिए। इस अवसर पर बोलते हुए सीएमओ डॉ अशोक शुक्ला ने कहा कि, शहर में गंदगी बढ़ती जा रही है, प्लास्टिक एक बहुत बड़ा चैलेंज बन चुका है। शहर में जो स्थितियां है वो मच्छरों के पनपने के लिए पर्याप्त हैं। उन्होंने कहा कि, मुख्यमंत्री जी स्वयं संचारी रोगों के प्रति संवेदनशील हैं। विगत 2 वर्षों से संचारी रोग नियंत्रण पर ध्यान दिया जा रहा है। संचारी रोग नियंत्रण अभियान के अंतर्गत मच्छर जनित रोगों का निदान केवल स्वास्थ्य चिकित्सा विभाग नहीं कर सकता है। इसी वजह से मुख्यमंत्री जी के निर्देशों पर संचारी रोग पखवाड़ा भी चलाते रहते हैं। इन पखवाड़ों के आयोजन में स्वास्थ्य विभाग के साथ ही नगर निगम, बेसिक शिक्षा, पंचायती राज, ग्राम्य विकास, बाल विकास एवं पुष्टाहार, सिंचाई विभाग, कृषि विभाग आदि भी अहम् योगदान देते हैं। संचारी रोग नियंत्रण हेतु स्वास्थ्य विभाग कटिबद्ध है। सीएमओ ने बताया कि, कानपुर नगर स्वास्थ्य विभाग द्वारा एकीकृत योजना बनाकर लार्वीसाइडल स्प्रे व फोगिंग का कार्य किया जा रहा है। इस वर्ष कानपुर नगर में डेंगू के अधिक केस आये हैं  विभाग द्वारा त्वरित चिकित्सा प्रदान करने के बाद किसी भी केस में प्लेटलेट्स की कमी नहीं हुई है। डेंगू से हुई मृत्यु दर में भी काफी कमी आयी है। फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम कानपुर नगर में 2 चरणों में चलाया जा रहा है। प्रथम चरण में समस्त ग्रामीण इलाकों में 25 नवंबर से 30 नवंबर तक और द्वितीय चरण 16 दिसंबर से 30 दिसंबर तक नगरीय क्षेत्र में चलाया जाएगा। कार्यक्रम हेतु 1448 टीमों का गठन हुआ है जिसमें 1600 से ऊपर आशाएं, 500 से ऊपर आंगनवाड़ी और ए एन एम प्रत्येक घर जाकर फाइलेरिया में विशेष रूप से कारगर मल्टीप्ल ड्रग थेरेपी का सेवन कराया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि, इस कार्यक्रम के तहत ट्रिपल ड्रग्स जिनमें डीईसी, अल्बेंडाज़ोल और आईवरमेक्टिन 5 वर्ष के ऊपर के बच्चों को खिलाई जायेगी जो कि लम्बाई के हिसाब से होगा। मेजरिंग टेप से लम्बाई नाप कर डोज़ दिया जाएगा। किसी भी दवा का साइड इफ़ेक्ट रोकने के लिए ऑल रैपिड रिस्पांस टीम का भी गठन किया गया है। इससे साइड इफ़ेक्ट का त्वरित निदान संभव हो सकेगा। हम फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को पाने में सफल होंगे। सीएमओ ने अंत में बताया कि, हम लिम्फैटिक फाइलेसिस, हाइड्रोसील जैसी बीमारियां बचा पाएंगे। कानपुर नगर में हमने 8 साइट 4 सेंटीनल और 4 रैंडम साइट्स पर सर्वे करवाया जिसमें 4000 नाईट स्फियर में रैंडम सिलेक्शन पर हमें 65 पॉजिटिव मिले थे, जिससे सिद्ध हुआ कि माइक्रोफाइलेरिया का सर्कुलेशन है, ये सर्कुलेशन हम दवाई खिलाकर रोक सकते हैं। अपर निदेशक (वेक्टर बॉर्न डिजीज) डॉ वी पी सिंह ने बताया कि, यह हर्ष का विषय है कि फाइलेरिया उन्मूलन का शुभारम्भ सीएचसी सरसौल से कर रहे हैं। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में भारत में 5 जनपदों में यह कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया था जिसमें उ प्र का वाराणसी शहर शामिल था। इस पायलट ट्रिपल ड्रग के कारण उ प्र के 11 जनपदों में इसे स्कलेअप करके लागू  किया गया है। पूर्व ड्रग थेरेपी से ये भिन्न  इसलिए है क्यूंकि यह ट्रिपल ड्रग है और जहाँ 6 से 7 वर्ष लगते थे इसके डोज़ में वहीं अब 2 से 3 वर्ष में डोज़ साईकल पूरी हो जायेगी। इस डोज़ के साइड इफ़ेक्ट नहीं है। 2 वर्ष से कम की आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी को इस दवा का सेवन करना चाहिए। डॉ सिंह ने आगे कहा कि उ प्र के जनपदों में जो सर्वे किया गया है, उसमें ये पाया गया है कि 9 से 21 प्रतिशत स्वस्थ व्यक्तियों में भी माइक्रो फाइलेरिया पाया गया है, यदि इस दृष्टि से देखें तो कानपुर में लगभग 5 लाख लोग ऐसे हैं, जिनमें अंदर ये कीटाणु मौजूद है। सभी लोग यदि दवाओं का सेवन करेंगे तो हाथीपाँव के प्रसार को हम रोक सकेंगे। शुरू में इस बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं और इसके कण पनपते रहते हैं, जिनको दवा के सेवन से ही समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि, फाइलेरिया जिसे हम हाथीपाँव के नाम से जानते हैं, अंडकोष सूजन जिसे हाइड्रोसील के नाम से जानते हैं और काइबीरिया जिससे  सफ़ेद रंग का द्रव आने लगता है, ये सभी बीमारियां 10 से 15 साल बाद हो जाती हैं। हमारा विशेष ध्यान टीकाकरण अभियान पर है, इससे हम अपने बच्चों का जीवन सुरक्षित करते हैं।  हमें बच्चों को सुरक्षित भी करना है और क्षमता विकास में भी ध्यान देना है। क्यूंकि जब हम सुरक्षित होंगे तभी हमारी क्षमता का विकास होगा अन्यथा बीमार पड़ कर शरीर की चुस्ती खो देंगे। अपर निदेशक भारत सरकार और फाइलेरिया उन्मूलन नोडल अधिकारी डॉ नूपुर रॉय ने कहा कि, मैं ये बताना चाहूंगी कि वर्ल्ड हेल्थ असेंबली 1997 में ये तय हुआ था कि भारत को हम फाइलेरिया मुक्त बनाएंगे। इसके तहत नेशनल हेल्थ पॉलिसी 2002 में भारत का गोल निर्धारित हुआ था कि 2017 तक भारत फाइलेरिया मुक्त होगा जबकि ग्लोबल गोल 2020 है। इसी के चलते 2004 सर्वजन दवा सेवन और मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन टू द पापुलेशन एट रिस्क के तहत भारत की जनसंख्या में भी संक्रमण का रिस्क है। ये रिस्क 45 प्रतिशत उ प्र की भी है क्यूंकि ये सबसे बड़ा राज्य है। उ प्र के 75 जनपदों में 51 जनपदों को एंडेमिक चुना गया। अगर यू पी फाइलेरिया मुक्त होगा तभी भारत फाइलेरिया मुक्त हो सकेगा। डॉ नूपुर ने बताया कि, विश्व में डिसेबिलिटी का दूसरा सबसे बड़ा कारण फाइलेरिया है। इसको हम रोक सकते हैं क्यूंकि ये इन्फेक्शन बचपन में होता है और 10 साल बाद इसका मनिफेस्टेशन हो जाता है। एक बार मनिफेस्टेशन हो जाने से शिक्षा, नौकरी, विवाह सबमें अड़चनें आ जाती हैं। सन 2000 में उन्मूलन डीईसी ड्रग से शुरू हुआ, फिर 2007 में अल्बेंडाज़ोल जुड़ी जिससे डबल ड्रग हुआ और अब ट्रिपल ड्रग आइवरमेक्टिन के जुड़ने से। विश्व की अलग अलग जगहों पर रिसर्च में पाया गया है कि डब्लू एच ओ के अनुसार डबल ड्रग में 5 से 6 साल का वक्त लगता है वहीं ट्रिपल ड्रग से ये कार्य 2 से 3 साल में हो जाएगा। हमारे पास समय कम है इसलिए ट्रिपल ड्रग में हम स्विचोवर कर रहे हैं। डॉ नूपुर ने आगे कहा कि, अल्बेंडाज़ोल डब्लूएचओ डोनेट करती है वहीं डी ई सी भारत सरकार खरीद कर देती है और आइवरमेक्टिन वेटिकन डोनेशन प्रोग्राम के माध्यम से प्राप्त हो रही है। इसी कारण उ प्र के 11 जिलों में ट्रिपल ड्रग करवाया जा रहा है। 11 जनपदों में ट्रिपल ड्रग और शेष 8 जनपदों में अभी डबल ड्रग ही होगा। अगली बार हम कोशिश करेंगे सभी जिलों को ट्रिपल ड्रग से जोड़ा जाए। ज़्यादातर शुभारम्भ होटलों य किसी अच्छी जगह होते हैं पर मैं कैबिनेट मंत्री जी की आभारी हूँ कि ग्रामीण क्षेत्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चुना गया। हमें बच्चों के भविष्य को बचाना ही होगा। उन्होंने जिला टीमों को ज़्यादा आवाजाही वाले क्षेत्रों में कैंप लगाने को कहा। उन्होंने कहा कि यदि 1000 लोगों में 900 का टीकाकरण हो गया है और 100 शेष हैं तो काम अधूरा है संक्रमण फ़ैल सकता है। 


 तदोपरांत मा0 मंत्री द्वय ने फाइलेरिया से बचने के लिए बच्चों को दवा पिलाई और फाइलेरिया (हाथीपांव) को जड़ से समाप्त करने के लिए और चलाये गये अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए सभी लोगों को शपथ दिलाई।


इस अवसर पर मंडलायुक्त सुधीर एम बोबडे, निदेशक संचारी रोग डॉ मिथिलेश चतुर्वेदी, अपर निदेशक डॉ वी पी सिंह, अपर निदेशक डॉ नुपूर रॉय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 अशोक शुक्ला, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आर एन सिंह, एसडीएम नर्वल, शिखा द्विवेदी, राकेश तिवारी, कमलेश द्विवेदी, मिथलेश मिश्रा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी/कर्मी एवं विद्यालयों के बच्चे व अभिभावक मौजूद रहे।