गंगा जी यदि कानपुर में स्वच्छ हो गईं तो यह निश्चित है कि इनकी पूरी धारा साफ और निर्मल हो जाएगी: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

> उत्तर प्रदेश के 32 शहरों में कुल 104 एस0टी0पी0 का निर्माण किया गया है, जिनकी कुल शोधन क्षमता 3,298 एम0एल0डी0 है।


> नमामि गंगे कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन में प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी सबसे अधिक: मुख्यमंत्री


> दिसम्बर, 2018 से 155 नालों के शोधन का कार्य किया गया है: मुख्यमंत्री


> नमामि गंगे कार्यक्रम के सहयोग से कुम्भ मेले में 01 लाख से अधिक सामुदायिक शौचालय स्थापित किए गए: मुख्यमंत्री


> गंगा जी के किनारे स्थित समस्त 1,638 ग्रामों को खुले में शौच मुक्त किया जा चुका है: मुख्यमंत्री


> नमामि गंगे परियोजना की अवधि बढ़ाए जाने पर विचार किए जाने की है आवश्यकता: मुख्यमंत्री 


> सॉलिड वेस्ट मैनेजमेण्ट के प्रोसेसिंग डिस्पोजल का विश्व के अन्य देशों में प्रचलित कारगर तरीका अपनाना उचित होगा: मुख्यमंत्री



दिनांक 14 दिसम्बर, 2019 को मा0 प्रधानमंत्री जी की अध्यक्षता में कानपुर में राष्ट्रीय गंगा परिषद की प्रथम बैठक हेतु वार्ता बिन्दु-


कानपुर (का ० उ ० सम्पादन)। बैठक में उ प्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रथम राष्ट्रीय गंगा परिषद् की बैठक में अपने मुख्य वक्तव्य में कहा कि, भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी, उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री मा0 श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी, बिहार के उप मुख्यमंत्री मा0 श्री सुशील कुमार मोदी जी, भारत सरकार के मा० जलशक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत जी, बैठक में उपस्थित मा० केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर जी, डॉ0 हर्षवर्धन जी, श्री प्रकाश जावड़ेकर जी, श्री प्रहलाद सिंह पटेल जी, श्री राजकुमार सिंह जी, श्री हरदीप सिंह पुरी जी, श्री मनसुख एल0 मंडाविया जी, उपाध्यक्ष, नीति आयोग डॉ० राजीव कुमार जी, प्रदेश के जलशक्ति मंत्री डॉ0 महेन्द्र सिंह जी, अधिकारीगण। राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में मैं आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का हृदय से स्वागत एवं अभिनन्दन करता हूं। इस आयोजन में सम्मिलित हो रहे मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी, उप मुख्यमंत्री बिहार श्री सुशील कुमार मोदी जी, भारत सरकार के मंत्रिगण एवं अन्य अतिथियों का भी मैं हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन करता हूं। उत्तर प्रदेश का यह सौभाग्य है कि राष्ट्रीय गंगा परिषद की प्रथम बैठक कानपुर में आयोजित हो रही है। इसके लिए मैं आदरणीय प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करता हूं। गंगा जी हमारे लिए जीवनदायिनी भी हैं और मोक्षदायिनी भी। धरती पर माँ गंगा का अवतरण मानव कल्याण हेतु हुआ है। पृथ्वी पर आकर उसे स्वर्ग बनाने वाली गंगा जी को भारतवासी अपनी माँ की तरह पूजते हैं और प्यार करते हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी ने ठीक ही कहा है कि रति, मणिति, मेलि सोई । सुरसरि सम सब कर हितु होई ।। भागीरथी तथा अलकनन्दा स्वरूप को देवभूमि देव-प्रयाग में एकीकृत करते हुए गंगा जी, गंगोत्री से बंगाल की खाड़ी तक 2523 कि0मी0 की अपनी लम्बी यात्रा हजारों वर्षों से अनवरत रूप से कर रही हैं। अपनी यात्रा के दौरान वे ऐसे अनेक बड़े शहरों से होकर गुजरती हैं, जहां जनसंख्या का घनत्व काफी अधिक होने के साथ-साथ कारखानों, फैक्ट्रियों व अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों की संख्या भी बहुत ज्यादा है। इसके परिणाम स्वरूप गंगा जी में प्रदूषण बढ़ता रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी के स्तर से प्रभावी पहल की गई। प्रधानमंत्री जी ने जून, 2014 में नमामि गंगे कार्यक्रम के माध्यम से गंगोत्री से गंगासागर तक गंगा जी को निर्मल बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया। गंगा जी का सर्वाधिक प्रवाह क्षेत्र उत्तर प्रदेश में है। इसलिए नमामि गंगे कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन में प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी भी सबसे अधिक है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा परियोजना के कार्यों को पूरी निष्ठा एवं प्रतिबद्धता के साथ क्रियान्वित कराया जा रहा है। नमामि गंगे कार्यक्रम के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश में 10 हजार 341 करोड़ 82 लाख रुपए की 45 सीवरेज परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। इनमें से 1,292 करोड़ 52 लाख रुपए की 12 परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। 07 परियोजनाओं को मार्च, 2020 तक पूरा किया जाना लक्षित है। 5,727 करोड़ 90 लाख रुपए की 21 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। 3,321 करोड़ 71 लाख रुपए की 12 परियोजनाएं निविदा प्रक्रिया में चल रही हैं। उत्तर प्रदेश के 32 शहरों में विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत कुल 104 एस0टी0पी0 का निर्माण किया गया है, जिनकी कुल शोधन क्षमता 3,298 एम0एल0डी0 है। कुल एस0टी0पी0 के अन्तर्गत पहुंचने वाले सीवरेज की मात्रा 2,248 एम0एल0डी0 है, जो सीवरेज की कुल क्षमता का 69 प्रतिशत है। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से प्रयागराज कुम्भ-2019 का भव्य और दिव्य आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। राज्य सरकार के प्रयास तथा केन्द्र सरकार के सहयोग से इस कुम्भ में काफी वर्षों बाद श्रद्धालुओं और स्नानार्थियों को गंगा जी अत्यन्त निर्मल और अविरल मिलीं। प्रयागराज कुम्भ-2019 में 24 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी के पावन संगम पर स्नान का पुण्य लाभ अर्जित किया। प्रयागराज कुम्भ के दौरान दिसम्बर, 2018 से 155 नालों के शोधन का कार्य किया गया है। नमामि गंगे कार्यक्रम के सहयोग से कुम्भ मेले में 01 लाख 22 हजार से अधिक सामुदायिक शौचालय स्थापित किए गए। कुम्भ मेला क्षेत्र खुले में शौच से मुक्त रहा तथा प्रयागराज कुम्भ ने स्वच्छ कुम्भ के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनायी। यह माननीय प्रधानमंत्री जी के स्वच्छता अभियान का एक जीवन्त उदाहरण सिद्ध हुआ। प्रदेश के 26 जनपदों के गंगा जी के किनारे स्थित समस्त 1,638 ग्रामों को खुले में शौच मुक्त किया जा चुका है। नदी की ऊपरी सतह की सफाई से लेकर बहते हुए ठोस कचरे की समस्या को हल करने के लिए 05 नगरों-वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, गढ़मुक्तेश्वर तथा मथुरा-वृन्दावन में घाट सफाई का कार्य आउटसोर्सिंग के माध्यम से किया जा रहा है। गंगा जी के किनारे स्थित 17 जनपदों में 5,100 एकड़ क्षेत्रफल पर प्रदेश के कृषि विभाग तथा यू०पी० डास्प द्वारा जैविक खेती को प्रोत्साहित करने की कार्यवाही की जा रही है। प्रदेश सरकार द्वारा इस वर्ष राज्य में 22 करोड़ से अधिक पौधों को रोपित किया गया। नमामि गंगे कार्यक्रम के अन्तर्गत गंगा जी के किनारे के 27 जनपदों में 6,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 102 करोड़ रुपए की वनीकरण परियोजना संचालित है, जिसका क्रियान्वयन वन विभाग के सहयोग से किया जा रहा है। प्रदेश के 26 जनपदों (गंगा जी के किनारे स्थित 25 जनपद तथा रामगंगा नदी का मुरादाबाद जनपद) में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला गंगा समिति गठित की गई है। प्रत्येक जिला गंगा समिति को गतिविधियां संचालित करने के लिए धनराशि उपलब्ध करायी गई है। मैं प्रधानमंत्री जी के संज्ञान में यह तथ्य लाना चाहूंगा कि गंगा जी की निर्मलता और अविरलता को सुनिश्चित करने के लिए गंगा जी एवं उनकी सहायक नदियों को नमामि गंगे कार्यक्रम से जोड़ते हुए परियोजना की अवधि बढ़ाए जाने पर विचार किए जाने की आवश्यकता है। गंगा जी एवं उनकी सहायक नदियों के तट पर स्थित 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों को सीवरेज नेटवर्क तथा घरेलू सीवरेज कनेक्शन से पूर्ण रूप से संतृप्त किया जाना आवश्यक है, ताकि वर्षा काल में भी गंगा जी प्रदूषित न हों। जो नाले एस0टी0पी0 में टैप नहीं किए गए हैं, उनके टैप किए जाने तक की अवधि में उन्हें बायो-रैमिडिएशन तथा अन्य विधि से शोधित करने की कार्यवाही की जानी चाहिए। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेण्ट एक चुनौतीपूर्ण समस्या है। म्युनिसिपल वेस्ट से तैयार की जा रही कम्पोस्ट खाद कृषक के लिए उपयोगी नहीं है। अतः सॉलिड वेस्ट मैनेजमेण्ट के प्रोसेसिंग डिस्पोजल का विश्व के अन्य देशों में प्रचलित कारगर तरीका अपनाना उचित होगा। आदरणीय प्रधानमंत्री जी द्वारा इस वर्ष 08 मार्च को कानपुर में सीसामऊ नाले के इन्टरसेप्शन एवं डाईवर्जन कार्य का लोकार्पण किया गया था। इसके माध्यम से एशिया के सबसे बड़े नालों में सम्मिलित सीसामऊ नाले के पानी को ट्रीटकर गंगा जी के पानी को स्वच्छ बनाये रखने की कार्यवाही की जा रही है। यहां अब एक बूंद भी सीवर का पानी नहीं गिरता। यहां पर निर्मित सेल्फी प्वाइण्ट पर मैंने अपनी प्रथम सेल्फी ली। यह मेरे जीवन का एक स्वर्णिम पल था। चूंकि गंगा जी यदि कानपुर में स्वच्छ हो गईं हैं, तो यह निश्चित है कि आदरणीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में इनकी पूरी धारा साफ और निर्मल हो जाएगी। एक बार पुनः आदरणीय प्रधानमंत्री जी एवं अन्य अतिथियों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन करते हुए मैं अपनी बात समाप्त करता हूं। धन्यवाद।


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