कारागार सुधार गृह हैं, इन्हें अपराध का गढ़ नहीं बनने दिया जाएगा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

> कारागारों में अपराधी तथा अपराधी प्रवृत्ति के तत्वों को अनुशासन में रखना आवश्यक: योगी आदित्यनाथ


> वीडियो वॉल की स्थापना डिजिटलाइज़ेशन ऑफ जेल्स की दिशा में उठाया गया कदम है: अपर मुख्य सचिव गृह



लखनऊ (का ० उ ० सम्पादन)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि टेक्नोलॉजी से किसी भी काम को आसान बनाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए उचित प्रशिक्षण तथा इसे लागू करने वाली टीम के मध्य समन्वय आवश्यक है। कारागार विभाग ने टेक्नोलॉजी के उपयोग से तेजी से सुधार किया है। सकारात्मक बदलाव के लिए व्यापक कार्य योजना के साथ कार्य किया जा रहा है। इसमें पेश आने वाली चुनौतियों का टीम भावना के साथ सामना करना होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को यहां कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं मुख्यालय लखनऊ के कमाण्ड एण्ड कन्ट्रोल सेण्टर में स्थापित वीडियो वॉल के लोकार्पण अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। यह कमाण्ड एण्ड कन्ट्रोल सेण्टर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित है। उन्होंने कहा कि आज संविधान के शिल्पी बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर का 64वां परिनिर्वाण दिवस है। उनका कहना था कि यह महत्वपूर्ण नहीं है कि संविधान कितना बड़ा या अच्छा है, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि इसे लागू करने वाले लोग कैसे हैं। उन्होंने कहा कि यही बात टेक्नोलॉजी के सन्दर्भ में भी लागू होती है। योगी जी ने कहा कि कारागार विभाग द्वारा तकनीक का उपयोग कर कारागारों के निरीक्षण की प्रभावी व्यवस्था बनायी गई है। इससे अपराधों पर भी नियंत्रण होगा साथ ही, कानून व्यवस्था की स्थिति और बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि कारागार सुधार गृह हैं, इन्हें अपराध का गढ़ नहीं बनने दिया जाएगा। कारागार विभाग द्वारा कारागारों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। वीडियो वॉल इस कार्य में सहायक होगी। वॉल के माध्यम से निरन्तर कनेक्टिविटी रहेगीउन्होंने कहा कि निरन्तर कनेक्टिविटी के लिए जरूरी मेन्टेनेंस की भी व्यवस्था की जानी चाहिए।



मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश के कारागारों में लगभग 01 लाख बन्दी निरुद्ध हैं। यह एक बड़ा मानव संसाधन है। इस संसाधन के सकारात्मक उपयोग के बारे में विचार किया जाना चाहिए। इस मानव संसाधन को रचनात्मक कार्यों से जोड़ा जा सके, तो यह पूरे देश के लिए अनुकरणीय होगा। उन्होंने कहा कि कारागारों में अपराधी तथा अपराधी प्रवृत्ति के तत्वों को अनुशासन में रखना आवश्यक है। इसके साथ ही, बन्दियों को अनुमन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराये जाने की जरूरत है। इसके लिए निगरानी की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की इस दिशा में कार्य करना चाहिए। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव गृह, कारागार प्रशासन एवं सुधार अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि प्रदेश के कारागारों की क्षमता 60 हजार बन्दियों की है। जबकि यहां के कारागारों में 01 लाख बन्दी निरुद्ध हैं। इस अधिकता के कारण प्रदेश के कारागारों में कर्मियों की कमी की समस्या है। कारागारों में मानव संसाधन की समस्या के निराकरण के लिए कार्यवाही की जा रही है। पुलिस विभाग की भर्ती के पश्चात प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों में से एक हजार प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों को जेल वार्डन के रूप में जेलों में तैनात करने की व्यवस्था की गई है। दूसरे चरण में पी0ए0सी0 के चयनित अभ्यर्थियों में से जो अभ्यर्थी कारागार विभाग में जाना चाहेंगे, उन्हें जाने का अवसर मिलेगा। तीन हजार कारागार कर्मियों की आउटसोर्सिंग के माध्यम से तैनाती के लिए एजेंसी का चयन कर लिया गया है।



अपर मुख्य सचिव ने कहा कि कारागार मुख्यालय में वीडियो वॉल की स्थापना डिजिटलाइज़ेशन ऑफ जेल्स की दिशा में उठाया गया कदम है। कारागारों में निरुद्ध बन्दियों की अदालतों में पेशी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से किये जाने की व्यवस्था की जा रही है। जनपदों में जिला मजिस्ट्रेट तथा पुलिस अधीक्षक के जेलों के निरीक्षण से जेलों से आने वाली शिकायतों में कमी आयी है। उन्होंने कहा कि कारागारों में मोबाइल फोन आदि के प्रयोग को समाप्त करने के लिए कानून बनाया जा रहा है। इसके लिए सजा को 06 माह से बढ़ाकर 03 साल किये जाने की योजना है। इसके अलावा विजिटर शेड, बैरक बढ़ाने आदि की भी व्यवस्था हो रही है। महिला कैदियों को डिविजनल लेवल पर रखने की व्यवस्था पर भी कार्य हो रहा है। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं आनन्द कुमार ने कहा कि गत वर्ष 02 अक्टूबर को कारागार मुख्यालय भवन का लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया गया था। आज यहां उनके द्वारा वीडियो वॉल का लोकार्पण किया गया है। वीडियो वॉल कारागारों की गतिविधियों पर नजर रखने का अभिनव प्रयास है। इसके माध्यम कारागारों में संवेदनशील स्थानों पर लगे कैमरे की फीड वीडियो वॉल पर दिखायी देगी। इसके तहत जनपद तथा मुख्यालय के अधिकारियों को अलर्ट की भी व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि कारागार में मोबाइल फोन पूरी तरह से प्रतिबन्धित है। कोई भी व्यक्ति या कर्मचारी कारागार के अन्दर मोबाइल फोन नहीं ले जा सकता। इस सम्बन्ध में विभाग की जीरो टॉलरेंस की नीति है। मोबाइल फोन कारागार में ले जाने पर 02 कारागार कर्मी बर्खास्त किये गये हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 05 जेलों का उच्चीकरण किया जा रहा है। प्रदेश की 25 जेलों में कम्युनिटी रेडियो संचालित है। इसे सभी कारागारों में स्थापित किया जाएगा। कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री योगी को पुलिस महानिदेशक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं आनन्द कुमार ने स्मृति चिन्ह के रूप में बन्दियों द्वारा देवालयों में जलायी गई धूप की राख से निर्मित मूर्ति प्रदान की। कार्यक्रम के अन्त में अपर पुलिस महानिदेशक श्री शरद ने अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर कारागार राज्य मंत्री जयकुमार सिंह जैकी, पुलिस महानिदेशक ओ0पी0 सिंह, पूर्व पुलिस महानिदेशक  सुलखान सिंह सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।


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