आईआईटी कानपुर मेडटेक द्वारा आयोजित 'मेडिकल डिवाइस प्रोटोटाइप प्रशिक्षण' की कार्यशाला का उद्घाटन

> कार्यशाला में 30 प्रेरित डॉक्टरों, उद्यमियों और इंजीनियरों द्वारा भाग लिया जा रहा है l

> चिकित्सकों को इंजीनियरों और डिजाइनरों के साथ मिलकर काम करना चाहिए: डॉ० कविता सिंह

> जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत देशभर में 40 से अधिक इनक्यूबेटर सक्रिय जोकि मेक इन इंडिया कार्यक्रम की कमियों को पूरा रहे हैं।


 

कानपुर (का ० उ ० सम्पादन)। जबकी हमारा देश नयी आकाँक्षाओं के साथ नए दशक में प्रवेश कर रहा है, आने वाला समय हमारे देश के लिए सामाजिक और आर्थिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण होने जा रहा है। भारत जैसे देश में सरकारी स्वास्थ्य सेवा व्यय जीडीपी का लगभग 2% है। अगर हम अपने नागरिकों के जीवन स्तर को बढ़ाना चाहते हैं, तो हमें स्वास्थ्य सेवाओं पर अपना खर्च बढ़ाना होगा। स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करने का मतलब है चिकित्सा सेवाओं और उत्पादों पर खर्च करना। चूंकि नए भारत की आय बढ़ रही है, इसलिए स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च करने की भारतियों की क्षमता भी बढ़ी है। भारत को सस्ते समाधानों के वैश्विक केंद्र के रूप में जाना जाता है, जो वैश्विक बाजार में मुकाबला करने की क्षमता वाले कई स्वदेशी और कम लागत वाले उपकरणों का उत्पादन करता है। आईआईटी कानपुर के मेडिकल टेक्नोलॉजी केंद्र के प्रभारी प्रोफ़ेसर जे० रामकुमार ने चिकित्सा उपकरणों के प्रोटोटाइप के निर्माण के लिए समर्पित मेडिकल टेक्नोलॉजी केंद्र (मेडटेक) द्वारा आयोजित 'मेडिकल डिवाइस प्रोटोटाइप प्रशिक्षण' की कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए ये बातें बतायीं। यह कार्यशाला आईआईटी कानपुर में 13 जनवरी से 17 जनवरी 2020 तक आयोजित की गयी है। कार्यशाला का उद्घाटन राष्ट्रीय बायोफार्मामिशन की मिशन निदेशक डॉ कविता सिंह द्वारा किया गया। राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार की एक पहल है,  जो पूरे भारत में स्वास्थ्य सेवा उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आधारभूत अवसंरचना की स्थापना के लिए काम कर रही है। राष्ट्रीय बायोफार्मामिशन के एक भाग के रूप में, आईआईटी कानपुर में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर जे० रामकुमार की देखरेख में एक मेडिकल टेक्नोलॉजी केंद्र की स्थापना की गयी है। कार्यशाला में 30 प्रेरित डॉक्टरों, उद्यमियों और इंजीनियरों द्वारा भाग लिया जा रहा है l जिन्हें चिकित्सा उपकरणों के आविष्कार के लिए उत्पाद डिजाइन विधियों को समझने तथा उन चिकित्सा उपकरणों के लिए बाजार के अवसरों और अनुदान के लिए खोज करने के लिए व्याख्यान और कार्यशाला की एक श्रृंखला के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाएगा। डॉ० कविता सिंह के साथ प्रो० एस० गणेश डीन (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) आईआईटी कानपुर, स्टार्टअप इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेंटर (एसआईआईसी) के प्रभारी प्रो० अमिताभ बंद्योपाध्याय ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की। 

प्रो अमिताभ ने उपस्थित लोगों से कहा कि हमारी स्टार्टअप इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेंटर (एसआईआईसी) सुविधा में मेडटेक और बायोटेक आधारित कंपनियां बहुत तेज़ गति से प्रगति कर रही हैं। हमारे देश की आकाँक्षाओं को पूरा करने के लिए, हमें अपने देश में ही आधारित आविष्कारों और उद्यमियों की आवश्यकता है, जो हमारी स्थानीय समस्याओं को स्थानीय लेकिन उत्कृष्ट समाधानों के साथ हल कर सकते हैं। उन्होंने उद्यमियों और डॉक्टरों से कहा कि यदि आप किसी कंपनी की स्थापना में कोई सहायता चाहते हैं तो हम सहायता के लिए सदैव तत्पर हैं। प्रो0 गणेश, ने आईआईटी कानपुर में नियमित शैक्षणिक कार्यक्रम के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के विचार पर जोर दिया है जो ऐसे कुशल स्नातकों का निर्माण करेगी जो भविष्य में आविष्कारक और उद्यमी बनें। उन्होंने बताया कि हमारे पास आईआईटी कानपुर और केजीएमयू के बीच एक सफल सहयोगी कार्यक्रम है जिसमें डॉक्टरों और इंजीनियरों ने मिलकर बहुत सारे पेटेंट अर्जित किये हैं। डॉक्टरों और इंजीनियर के बीच के सहयोग की आवश्यकता और महत्व के बारे में बात करते हुए डॉ0 कविता सिंह ने बताया कि जैसा कि यह वर्कशॉप चिकित्सा उपकरणों के बारे में है,  हमें इनके उपभोक्ताओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा जो चिकित्सा पेशेवर हैं और उन्हें इंजीनियरों और डिजाइनरों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत देशभर में 40 से अधिक इनक्यूबेटर सक्रिय है। ये इनक्यूबेटर हर क्षेत्र में उद्यमी पैदा कर रहे हैं और मेक इन इंडिया कार्यक्रम की कमियों को पूरा रहे हैं। उन्होंने बताया कि चिकित्सा उपकरण उद्यमियों के लिए पर्यावरण कभी इतना अनुकूल नहीं था जहां सरकार प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के साथ उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए 2 और टियर 3 शहरों तक भी पहुंच रही है। कार्यशाला संयुक्त रूप से आईआईटी कानपुर में इमेजिनियरिंग लैब तथा बायोटेक्नोलॉजी विभाग, भारत सरकार द्वारा पेटेंट और कौशल विकास के लिए स्वीकृत कंपनी बायोटेक कंसोर्टियम इंडिया लिमिटेड (बीसीआईएल) द्वारा आयोजित की जा रही है। इसमें चिकित्सा उपकरणों के लिए प्रोटोटाइप, उत्पाद डिजाइन, पेटेंट और नियामक के लेक्चर तथा कार्यशालाएं होंगी। इमेजिनियरिंग लैब के डॉ अमनदीप सिंह और बीसीआईएल की तरफ से श्रेया मलिक उद्घाटन के लिए मौजूद रहे।


चित्र में बायीं तरफ से इमेजीनियरिंग लैब आईआईटी कानपुर के प्रो डॉ अमनदीप सिंह, आईआईटी कानपुर रिसर्च एंड डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के प्रो गणेश, बीसीआईएल की श्रेया मलिक, नेशनल बायोफार्मा मिशन की मिशन डायरेक्टर डॉ कविता सिंह, एसआईआईसी आईआईटी कानपुर के इंचार्ज प्रो अमिताभ बंदोपाध्याय व आईआईटी कानपुर मेडटेक फैसिलिटी के इंचार्ज प्रो जे रामकुमार।

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