प्रकरण को अनावश्यक रूप से विलम्बित करने वाले अधिकारियों को चिन्हित कर दण्डित किया जाये: मुख्य सचिव

卐 निस्तारण हेतु प्रकरणों से सम्बंधित जानकारी अथवा आख्या अधिकतम एक माह में जनपदीय अधिकारियों द्वारा अवश्य उपलब्ध न कराने की स्थिति पर सम्बन्धित जनपदों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को आगामी उद्योग बन्धु की बैठकों में उपस्थित होकर देना होगा स्पष्टीकरण: मुख्य सचिव

 

卐 उद्यमियों की समस्याओं के नियमानुसार समाधान में एक बार से अधिक क्वेरी लगाने पर होगी कड़ी कार्यवाही: मुख्य सचिव

 

卐 आगामी 05 वर्ष तक पूंजी निवेश 05 करोड़ रुपये य अधिक वाली नई खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों में  मण्डी शुल्क से छूट की व्यवस्था में स्पष्ट नियम बनाने हेतु मण्डी परिषद को दिये निर्देश।

 

卐 12 प्रकरणों का बैठक में तत्काल निस्तारण, 18 मामलों मेंसम्बंधित विभागों को समयबद्ध रूप से त्वरित निस्तारण हेतु निर्देश।


लखनऊ 08 जनवरी, 2020। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिये हैं कि किसी भी उद्यमी को अपने उद्योग की समस्याओं का नियमानुसार निस्तारण कराने हेतु किसी भी कार्यालय का चक्कर न लगाना पड़े। उन्होंने निर्देश दिये कि राज्य सरकार की औद्योगिक एवं निवेशोन्मुख नीतियों व नियमों के अनुसार उद्यमियों की समस्याओं का तत्काल अथवा निश्चित समय-सीमा पर निर्णय कराये जायें, ताकि उद्यमियों को उद्योग बन्धु की बैठकों में मात्र एक बार आना पड़े। उन्होंने यह भी निर्देश दिये हैं कि उद्योग बन्धु में निस्तारण हेतु उठाये गये प्रकरणों से सम्बंधित जानकारी अथवा आख्या अधिकतम एक माह में जनपदीय अधिकारी अवश्य उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। अन्यथा उद्योग बन्धु की आगामी बैठक में सम्बंधित विभागीय अधिकारी के साथ-साथ सम्बंधित मण्डलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों को भी राज्य स्तरीय उद्योग बन्धु की बैठक में उपस्थित होकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ेगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिये हैं कि लंबित प्रकरणों को पन्द्रह दिन में सूचीबद्ध कर नियमानुसार निस्तारण हेतु सक्षम स्तर से अनुमोदन प्राप्त किया जाना सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकरण में अनावश्यक रूप से विलंबित होने अथवा बार-बार क्वेरी लगाने की पुष्टि हुई तो सम्बंधित अधिकारियों को चिन्हित कर दण्डित किया जायेगा। मुख्य सचिव बीते बुधवार को योजना भवन में उच्च स्तरीय उद्योग बन्धु की बैठक की अध्यक्षता कर लम्बित प्रकरणों का निस्तारण कराने हेतु विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे। उन्होंने जेआरजी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड प्रकरण का प्रकरण मण्डलायुक्त स्तर पर लम्बित रहने की सम्बंधित उद्यमी द्वारा जानकारी देने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिये हैं कि इतने लंबे समय तक प्रकरण को अनावश्यक रूप से विलम्बित करने वाले सम्बंधित अधिकारियों को चिन्हित कर दण्डित किया जाये। उन्होंने उच्च स्तरीय उद्योग बन्धु की बैठक में भाग लेने वाले अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि बैठक में प्रमुख सचिव के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित होने वाले विभागीय अधिकारी सम्बंधित प्रकरणों के सम्बंध में पूर्ण जानकारी के साथ बैठक में उपस्थित हों ताकि लम्बित प्रकरणों का निस्तारण में अनावश्यक रूप से विलम्ब न हो। राजेन्द्र कुमार तिवारी ने कहा कि प्रदेश का औद्योगिक विकास राज्य सरकार की उच्चतम प्राथमिकताओं में सम्मिलित है। मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के स्पष्ट निर्देशों के अनुपालन में उद्योगों की समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध रूप से कराने के उद्देश्य से उद्योग बन्धु की बैठक आईआईडीसी की अध्यक्षता में प्रत्येक माह तथा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रत्येक दो माह में आयोजित की जायेगी। उन्होंने जिला स्तर पर लम्बे समय से लम्बित भूमि सम्बन्धित प्रकरणों पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुये निर्देश दिये कि उद्योगों के लिये भूमि सम्बन्धी रिपोर्ट जिला प्रशासन द्वारा एक माह के अन्दर अवश्य उपलब्ध करा दी जाये। मुख्य सचिव ने मण्डी परिषद को निर्देश दिये कि नई खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, जिसमें प्लाण्ट एवं मशीनरी में आगामी 05 वर्ष तक पूंजी निवेश 05 करोड़ रुपये या अधिक हो, उनकी नीति के अनुसार मण्डी शुल्क से छूट के प्रतिशत की व्यवस्था में पारदर्शिता के साथ स्पष्ट नियम बनाये जायें। उन्होंने कहा कि जिन प्रकरणों में विलम्ब हुआ है, उनमें सम्बन्धित अधिकारियों की जिम्मेदारी नियत कर नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करायी जाये। बैठक में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग, आवास विभाग, स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग, कृषि विपणन विभाग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, पंचायतीराज विभाग, उ.प्र. राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा), पिकप एवं राजस्व विभाग के 12 प्रकरणों का बैठक में तत्काल निस्तारण कर दिया गया तथा 18 मामलों में सम्बंधित विभागों को समयबद्ध रूप से त्वरित निस्तारण हेतु निर्देश दिए गए। बैठक में सम्बन्धित उद्यमियों के साथ-साथ अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, आलोक टण्डन, अपर मुख्य सचिव, राजस्व, श्रीमती रेनुका कुमार, प्रमुख सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास, आलोक कुमार, प्रमुख सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, नवनीत सहगल, प्रमुख सचिव, स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन, श्रीमती वीना कुमारी मीणा, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, यूपीसीडा, अनिल गर्ग, तथा विशेष सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास, प्रभांशु श्रीवास्तव सहित सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

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