कृषकों की आय में वृद्धि करने एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में औद्यानिक फसलों का है महत्वपूर्ण योगदान

> एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजनान्तर्गत फल, मसाला व पुष्प क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम, पुराने एवं अनुत्पादक बागों का जीर्णोद्धार कार्यक्रम, जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु वर्मी कम्पोस्ट खाद उत्पादन कार्यक्रम, मधुमक्खी पालन कार्यक्रम, बागवानी में मशीनीकरण एवं पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेन्ट कार्यक्रम आदि कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं।


> विभिन्न कार्यक्रमों में लागत के सापेक्ष 25 से 50 प्रतिशत तक अनुदान अनुमन्य है।


> प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनान्तर्गत इकाई लागत के सापेक्ष अनुसूचित जाति अथवा जनजाति व लघु सीमान्त कृषकों को 90 प्रतिशत एवं अन्य कृषकों को 80 प्रतिशत अनुदान अनुमन्य है।


> वर्ष 2020 - 21 में 355 हे0 ड्रिप सिस्टम एवं 910 हे0 में स्प्रिंकलर सिस्टम की स्थापना के लक्ष्य प्राप्त हुए हैं।



कानपुर,10 सितम्बर, 2020। जिला उद्यान अधिकारी ने उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा संचालित प्रमुख योजनायें एवं उपलब्धियां के संबंध में बताया है कि कृषकों की आय में वृद्धि करने एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में औद्यानिक फसलों का महत्वपूर्ण योगदान है। औद्यानिक फसलों में प्रमुखतः फल, पुष्प व शाकभाजी फसलें आती हैं जो कि नकदी फसलें हैं तथा जिनसे कृषि फसलों की तुलना में प्रति हे0 काफी अधिक आय प्राप्त की जा सकती है। उद्यान विभाग द्वारा कृषकों के लाभार्थ नवीनतम एवं लाभाकारी औद्यानिक तकनीकों का प्रचार - प्रसार किया जाता है तथा साथ ही कई औद्यानिक विकास योजनायें संचालित की जाती है। उद्यान विभाग में संचालित समस्त योजनायें / कार्यक्रम डायरेक्ट बेनीफिट ट्रान्सफर (डीबीटी) के माध्यम से कृषि विभाग की वेबसाइट www.upagriculture.com पर कृषकों के ऑनलाइन पंजीकरण द्वारा प्रथम आवक प्रथम पावक के अधार पर क्रियान्वित किये जाते हैं। इच्छुक कृषक के स्वयं के नाम भूमि होनी चाहिए तथा सिंचाई सुविधा भी उपलब्ध होनी चाहिए। पंजीकरण हेतु 3 प्रपत्रों यथा-आधार कार्ड व बैंक पासबुक की छायाप्रति तथा अद्यतन खतौनी की आवश्यकता होती है। कृषक अपना पंजीकरण जनसुविधा केन्द्र / साइबर कैफे आदि से अथवा जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय में करा सकते हैं। 
 उन्होंने बताया कि एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजनान्तर्गत फल, मसाला व पुष्प क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम, पुराने एवं अनुत्पादक बागों का जीर्णोद्धार कार्यक्रम, जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु वर्मी कम्पोस्ट खाद उत्पादन कार्यक्रम, मधुमक्खी पालन कार्यक्रम, बागवानी में मशीनीकरण एवं पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेन्ट कार्यक्रम अन्तर्गत फलों, सब्जियों आदि की पैकेजिंग एवं ग्रेडिंग हेतु पैक हाउस, प्याज के भण्डारण हेतु प्याज भण्डारगृह, फल उत्पादों के द्वारा कैंडी, जैम, जैली, मुरब्बा, अचार आदि निर्मित करने हेतु प्रिजर्वेशन यूनिट की स्थापना, ग्रीन हाउस की स्थापना, छोटी पौधशाला की स्थापना आदि कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। विभिन्न कार्यक्रमों में लागत के सापेक्ष 25 से 50 प्रतिशत तक अनुदान अनुमन्य है। योजनान्तर्गत अनुसूचित जाति अथवा जनजाति श्रेणी के कृषकों हेतु पृथक से एससीपी कार्यक्रम भी संचालित किये जा रहें हैं। योजनान्तर्गत सभी श्रेणी के कृषक पात्र हैं। अनुसूचित जाति अथवा जनजाति, लघु सीमान्त एवं महिला कृषकों को नियमानुसार वरीयता प्रदान की जाती है। लक्ष्य के सापेक्ष कृषकों का ऑनलाइन पंजीकरण कराते हुए कार्यक्रम का क्रियान्वयन किया जा रहा है। उक्त कार्यक्रमों के अतिरिक्त योजनान्तर्गत प्रोजेक्ट आधारित कार्यक्रमों यथा- मशरूम इकाई की स्थापना, एकीकृत पैक हाउस, कोल्डरूम, मोबाइल अथवा  प्री कूलिंग यूनिट, प्राइमरी अथवा मोबाइल अथवा मिनिमल प्रोसेसिंग यूनिट, राइपनिंग चेम्बर, कोल्ड स्टोरज आदि कार्यक्रमों में भी अनुदान की सुविधा उपलब्ध है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अन्तर्गत समय में जल संरक्षण की अत्यन्त आवश्यकता है। कम पानी में अच्छी खेती करना इस योजना का प्रमुख उद्देश्य है। उक्त उद्देश्य की पूर्ति हेतु योजनान्तर्गत बागवानी एवं कृषि फसलों में पानी की बचत एवं फसल की गुणवत्ता में वृद्धि करने के उद्देश्य से ड्रिप अथवा स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम की स्थापना कृषकों के प्रक्षेत्र पर करायी जाती है। योजनान्तर्गत इकाई लागत के सापेक्ष अनुसूचित जाति अथवा जनजाति व लघु सीमान्त कृषकों को 90 प्रतिशत एवं अन्य कृषकों को 80 प्रतिशत अनुदान अनुमन्य है। शेष धनराशि कृषकों द्वारा स्वयं वहन की जाती है। वर्ष 2020 - 21 में 355 हे0 ड्रिप सिस्टम एवं 910 हे0 में स्प्रिंकलर सिस्टम की स्थापना के लक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जिसके सापेक्ष कृषकों का ऑनलाइन पंजीकरण कराते हुए कार्यक्रम क्रियान्वित किये जा रहे हैं। प्रधान मंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएफएफएमई) यह योजना मा0 प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं में एक है तथा आत्म निर्भर भारत अभियान के अन्तर्गत आती है। योजना के अन्तर्गत एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) की अवधारणा के आधार पर असंगठित क्षेत्र की खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों, जिनमे 10 से कम श्रमिक कार्य करते हैं, का उच्चीकरण कराने, उनको जीएसटी व एफएसएसएआई प्रमाणन दिलाने में सहायता करने आदि पर क्रेडिट लिंक बैंक इण्डेड पद्धति के आधार पर 35 प्रतिशत तथा अधिकतम 10.00 लाख रुपए प्रति इकाई अनुदान की सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी। पौधशालाओं में कृषकों को उद्यान रोपण हेतु सुगमतापूर्वक उच्च गुणवत्तायुक्त कलमी एवं बीजू फलदार पौधे उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अमरूद, नीबू, आवंला, करौंदा, कटहल, बेल आदि व शोभाकार पौधों का उत्पादन किया जाता है, जो कि कृषकों को नगद मूल्य पर विभागीय दरों पर उपलब्ध कराये जाते हैं। महात्मा गांधी खाद्य प्रसंस्करण ग्राम स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत गांव में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। मण्डल स्तर पर प्रधानाचार्य के नियंत्रण में राजकीय खाद्य विज्ञान प्रशिक्षण केन्द्र में संचालित है, जिसमें खाद्य प्रसंस्करण, कुकरी व बेकरी में एक वर्षीय डिप्लोमा कार्यक्रम संचालित हैं। डिप्लोमा कार्यक्रमों के अतिरिक्त केन्द्र पर इच्छुक उद्यमियों को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने हेतु तकनीकी जानकारी भी प्रदान की जाती है। कृषकों से अनुरोध है कि उक्त योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठायें एवं अपनी आय में वृद्धि करें।


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