ग्लोबल सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स प्राप्त करने के लिए जीसीआरएस ने आईआईटी कानपुर के साथ करार किया

> जीसीआरएस और आईआईटी कानपुर के बीच सहयोग से कंपनी के पर्यावरणीय जोखिम और सस्टेनेबिलिटी एनालिटिक्स प्लेटफार्मों को मजबूत किया जाएगा।


> आईआईटी कानपुर के साथ सहयोग निश्चित रूप से हमारी रिसर्च एंड डेवलपमेंट पहल को मजबूत करेगा : प्रसाद बाबू, संस्थापक, जीसीआरएस 



प्रसाद बाबू, संस्थापक, जीसीआरएस 


कानपुर। शहरी विकास की तीव्र गति और उभरती चुनौतियों के कारण सस्टेनेबिलिटी मेट्रिक्स ने हर दूसरे डेवलपमेंट इंडिकेटर पर वरीयता प्राप्त की है। जियो क्लाइमेट रिस्क सॉल्यूशंस (जीसीआरएस), जो पर्यावरण जोखिम मूल्यांकन और स्थिरता के क्षेत्र में विशेष कंपनी है, ने ग्लोबल सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स प्राप्त करने के लिए भू-विज्ञान संबंधी दीर्घकालिक समाधान प्रदान करने के लिए आईआईटी कानपुर के साथ हाथ मिलाया है। कंपनी के संस्थापक और सीईओ, प्रसाद बाबू, आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र हैं। एक निवेश भागीदार के रूप में गेल (इंडिया) लिमिटेड के साथ, जीसीआरएस का मूल्य 20 करोड़ रुपये है। जीसीआरएस ने इजरायल की अत्यधिक प्रसिद्ध राष्ट्रीय जल कंपनी के साथ मेकोरोटो जल क्षेत्र में एक साथ काम करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किया है। कंपनी के प्रमुख ग्राहकों में वर्ल्ड बैंक, यूएनडीपी, जीआईजेड, द वर्ल्ड बिजनेस काउंसिल फॉर सेलेबल डेवलपमेंट, ऑक्सफैम इंडिया, जल शक्ति मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय और वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, आदित्य बिड़ला ग्रुप, बिसलेरी, गवर्नमेंट ऑफ मेघालय, आईसी नेट (जापान) और एलडब्लूआर शामिल हैं। जीसीआरएस और आईआईटी कानपुर के बीच सहयोग से कंपनी के पर्यावरणीय जोखिम और सस्टेनेबिलिटी एनालिटिक्स प्लेटफार्मों को मजबूत किया जाएगा, जो महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर) के लिए विकसित किए गए हैं, जैसे कि क्रॉस-कंट्री हाइड्रोकार्बन पाइपलाइन और पानी की आपूर्ति पाइपलाइन, प्राकृतिक जल निकाय, नहर, राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे और (स्ट्रेटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर एस्टाब्लिशमेंट्स) रणनीतिक बुनियादी परियोजनायें। कंपनी ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पुनर्स्थापन, पर्यावरणीय स्थिरता और अपशिष्ट प्रबंधन समाधान के क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं शुरू करने की भी योजना बनाई है। जीसीआरएस के संस्थापक प्रसाद बाबू ने कहा कि आंध्र प्रदेश इनोवेशन सोसाइटी और नैसकॉम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) और इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स में कार्यालय होने के बावजूद, कंपनी ने टेक्नोपार्क आईआईटी कानपुर परिसर में अपना रिसर्च एंड डेवलपमेंट बेस स्थापित करना चुना। आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र होने के नाते और अपने अनुसंधान और नवाचार पर्यावरण समानता का बारीकी से अनुभव किया, यह हमारी कंपनी के रिसर्च एंड डेवलपमेंट केंद्र की स्थापना के लिए आईआईटी कानपुर में लौटने का मेरा स्पष्ट विकल्प था। हम वास्तव में महसूस करते हैं कि आईआईटी कानपुर के साथ सहयोग निश्चित रूप से हमारी रिसर्च एंड डेवलपमेंट पहल को मजबूत करेगा और विशाल अवसरों के लिए दरवाजे खोल देगा। आईआईटी कानपुर वर्तमान में जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजीज और रिमोट सेंसिंग के क्षेत्र में अग्रणी विशेषज्ञ है। प्रो अविनाश अग्रवाल, प्रोफेसर इंचार्ज, टेक्नोपार्क आईआईटी कानपुर ने कहा कि आईआईटी कानपुर रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी पार्क वर्तमान में सात कंपनियों का घर है और तीन और कंपनियों के जल्द ही जुड़ने की उम्मीद है। उन्होंने अन्य कंपनियों को इस पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा बनने और आईआईटी कानपुर में संकाय द्वारा किए गए उन्नत शोध का लाभ उठाने, सर्वोत्तम छात्र प्रतिभा के साथ अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।


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