एशिया का सबसे बड़ा तकनीकी और उद्यमी महोत्सव 'टेककृति' के 27 वें संस्करण का समापन

ज्ञानवर्धक टॉक, महत्वपूर्ण कार्यशालायें और बॉलीवुड नाईट ने बढ़ाया उत्साह

लार्सन एंड टूर्बो के कौस्तुव बागची, पद्म विभूषण अनिल काकोडकर, फंडामेंटल फिजिक्स के प्रो जॉन श्वार्ज, कंप्यूटिंग मशीनरी के क्षेत्र में एसोसिएशन फेलो जेफरी उल्ल्मन, नेशनल एकडेमी ऑफ साइंसेज के सदस्य रिचर्ड लिन्डजेन तथा गुंजन बागला व मधुबनी पेंटिंग राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता भारती दयाल ने अपने विचार व्यक्त किये साथ ही बॉलीवुड नाईट में के.के. की सुरीली आवाज का लोगों ने आनंद उठाया 

दैनिक कानपुर उजाला
कानपुर। दूसरे दिन के सफलतापूर्वक समापन के बाद टेककृति 21 का तीसरा और अंतिम दिन भी काफी अच्छा और रोमांचक रहा। दिन के अधिकांश भाग ने प्रेरणादायक और सूचनात्मक वार्ता को देखा। जॉन हेनरी श्वार्ज ने दर्शकों को स्ट्रिंग थ्योरी और 50 वर्षों से अधिक के उनके इस क्षेत्र में शोध के बारे में बताया। 1971 में पियरे रामोंड, आंद्रे नेवु और जॉन श्वार्ज ने दूसरा स्ट्रिंग थ्योरी (सुपरस्ट्रिंग्स) पाया। इस टॉक का समापन एक्स्ट्रा डाइमेंशन्स पर टॉक कर एवं किस तरह एक नया सिद्धांत इन नए आयामों को खोज सकता है पर चर्चा करके किया गया। इस थ्योरी का पुष्टीकरण अभी चल ही रहा है और दुनिया भर के कई महान शोधकर्ता इस थ्योरी पर काम कर रहे हैं। स्ट्रिंग थ्योरी में योगदान देने वाले व्यक्ति के मुख से सीधे आने वाले शब्द बहुत ही ज्ञानवर्धक थे। जेफरी उल्ल्मन ने अपने टॉक में तर्क दिया कि कैसे मशीन लर्निंग और डेटा साइंस, दोनों पूरी तरह से अलग - अलग क्षेत्र हैं। सांख्यिकीविद (स्टटिस्टिकन्स) डेटा साइंस को अपनी तरह से देखते हैं। आज तक जो भी डेटाबेस वाले लोग करते आ रहे हैं, डेटा साइंस इन सबका एक क्रमागत विकास है। अपनी बात को विराम देते हुए उल्ल्मन ने मुख्यतः दो बातें कहीं। पहली यह कि डेटा साइंस कंप्यूटर साइंस के विभिन्न छेत्रों में काम करने के तरीकों में एक क्रमागत उन्नति है। सांख्यिकीविदों ने इसे लगभग सही पाया लेकिन लोगों की समस्याओं को हल करने के बजाय उन्होंने विश्लेषण पर अपना ध्यान केंद्रित किया। दर्शकों ने काफी दिलचस्प प्रश्न पूछे। इस टॉक में सभी ओर से उत्साह देखने लायक था। भारत और साउथ एशिया में लार्सन एंड टूर्बो के प्रतिनिधि, कौस्तुव बागची ने अपनी बात में एल.एन.टी. का प्रतिनिधित्व किया और एल.एन.टी. की टीम किस प्रकार लगातार तकनीकी प्रगति के लिए काम करती है, इसका भी बखूबी बखान किया। अनिल काकोडकर एक भारतीय परमाणु भौतिक विज्ञानी (नुक्लेअर फिजिसिस्ट) हैं। वह भारत के परमाणु ऊर्जा आयोग (एटॉमिक एनर्जी कमीशन ऑफ इंडिया) के अध्यक्ष और भारत सरकार के सचिव थे। वह 1996 - 2000 के बीच भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के निदेशक रह चुके हैं। अपनी बात में उन्होंने जलवायु परिवर्तन का सामना करने और संसाधनों का उपयोग करने में विकसित देशों और भारत के सामने आने वाली चुनौतियों के बीच अंतर बताया। उन्होंने कहा कि अगर समस्या को नजरअंदाज किया गया तो मानव अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जापान और जर्मनी के दृष्टिकोण का उदाहरण दिया। साथ ही 2050 तक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारत की विद्युत उत्पादन योजना के लिए एक रणनीति दी। बायोमास, सौर, परमाणु ऊर्जा के उपयोग की तरह बिजली से परे डिकार्बोनाइजिंग ऊर्जा पर ध्यान आकर्षित किया। विकसित की जाने वाली अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों को सूचीबद्ध किया। फिर उन्होंने शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने के तरीके में आगे की चुनौतियों के बारे में बात करके अपनी ज्ञानवर्धक बातों का समापन किया। एथिकल हैकिंग और साइबर सिक्योरिटी, ऑटोमोटिव इंजन और आईसी इंजन, मशीन लर्निंग, वेब डेवलपमेंट, ड्रोन क्वाडकॉप्टर, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और एंड्रॉइड डेवलपमेंट पर कार्यशालाएं हुईं। तकनीकी और उद्यमिता प्रतियोगिताओं में एक बड़ी भागीदारी देखी गई जिसमें ई.सी.डी.सी., बीट द मार्केट, डिजाइन इवेंट्स, स्टॉक पिच, टेक्नोवेशन टी.आई.सी., एम.एल. हैकाथॉन, टेक ऑफ-आई.डी.आर.एल. शामिल थे। टेककृति '21 का आयोजन प्रसिद्ध बॉलीवुड गायक के.के. के एक बड़े शो के साथ संपन्न हुआ। अपनी मधुर आवाज और अद्भुत प्रदर्शन के साथ उन्होंने अपने संगीत के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।