स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है अधिक मात्रा में काढ़ा का सेवन

 > आयुर्वेदिक जूस पीने से कम हो जाता है कोरोना संक्रमण का खतरा : डॉ. रवीन्द्र  पोरवाल
> नियमित रूप से उचित आहार लेने से बढ़ती है इम्युनिटी : सेरिल सेलिस (डायटीशियन)

दैनिक कानपुर उजाला
कानपुर।
 छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में शुक्रवार 21 मई से ऑनलाइन योगा सेशन एवं स्वास्थ्य जागरुकता व्याख्यान प्रारम्भ हुए। इनका सजीव प्रसारण फेसबुक लाइव ऑन  वेलनेसकान पेज https://www.facebook.com/wellnesscon2020/live_videos पर हुआ। ऑनलाइन योगा सेशन एवं स्वास्थ्य जागरुकता व्याख्यान का उद्घाटन छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा किया गया। उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के समय इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन एक सराहनीय पहल है। इससे आम जनमानस लाभान्वित होगा। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन योगा सेशन व स्वास्थ्य जागरुकता व्याख्यान प्रतिदिन प्रातः 7 बजे से 9 बजे तक एक माह तक संचालित होंगे। कार्यक्रम का प्रारम्भ वंदना के द्वारा हुआ। वंदना संस्थान की योग शिक्षिका कु. सोनाली धनवानी ने प्रस्तुत की। प्रथम व्याख्यान का विषय था- "साक्षी ध्यान द्वारा सकारात्मक मानसिक विकास कैसे हो?" इस व्याख्यान के वक्ता योगा नेचर केयर विशेषज्ञ व डिवाइन रेकी सेंटर, कानपुर के संस्थापक डाॅ. ओम प्रकाश आनन्द ने ध्यान योग की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ध्यान करना आवश्यक है। ध्यान में आत्म शुद्धि होती है और सकारात्मकता आती है। ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपनी बुराइयों को दूर कर सकता है और एकाग्र होकर सकारात्मक दिशा में कार्य कर सकता है। दूसरे व्याख्यान का विषय था- "कोविड-19 महामारी में आयुर्वेद की महत्ता" इस विषय पर कानपुर नगर के आयुर्वेदाचार्य व योगाचार्य डॉ. रवींद्र पोरवाल ने बताया कि आयुर्वेद में बहुत सी ऐसी दवायें व जड़ी बूटियां हैं जो कोविड-19 से बचने में सहायता करती हैं व कोविड-19 दुष्प्रभाव को कम करती हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना के डबल म्यूटेंट से बचने के लिए 8 - 10 पीपल की पत्ती, 8 - 10 बेल पत्र, 5 ग्राम अदरक, 3 से 4 लौंग, 3 से 4 काली मिर्च, आधा कप पानी में मिलाकर इसको मिक्सी में पीसकर बना हुआ जूस पीने से कोरोना संक्रमण का खतरा अत्यंत कम हो जाता है। यह जूस शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता हे। उन्होंने बताया कि अंदरक में जिंगेरान तत्व होता है, जिंगेरान तत्व आई.एफ.एन. बीटा की उपस्थिति के कारण कोरोना वायरस के वायरल  लोड को खत्म करता देता है / कम कर देता है। उन्हेांने अपने व्याख्यान में थिरैप्यूटिक योगा की महत्ता पर प्रकाश डाला और कहा कि अब थिरैप्यूटिक योगा को अपनाने की आवश्यकता है। तीसरे व्याख्यान का विषय था - "nutrition resilience to win over covid" था। नर्चर हेल्थ सल्यूशन्स, मुम्बई की फाउंडर, रजिस्टर्ड डायटीशियन, नैचुरोपैथ एण्ड सर्टिफाइड डायबिटीज एजूकेटर श्रीमती सेरिल सेलिस ने कोविड महामारी के दौरान उचित आहार के विषय में बताया। उन्होंने बताया कि कोविड के दौरान लोग इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए अधिक मात्रा में विभिन्न चीजों का सेवन कर रहे हैं। इम्यूनिटी तुरंत नहीं बढ़ती है जबकि यह नियमित रूप से उचित आहार लेने से बढ़ती है। उन्होंने बताया कि खाने की प्लेट में आधा भाग सब्जियों तथा 1 / 4 भाग प्रोटीन व 1 / 4 भाग कार्बोहाड्रेट का होना चाहिए। व्यक्तियों केा ए - रैनबो की तरह का भोजन करना चाहिए, तात्पर्य वह भोजन जिसमें सब्जियां, फ्रूट अधिक हो, वह भोजन करना चाहिए। उन्हेांने बताया कि वह भोजन नहीं खाना चाहिए जिसमें एक भी फूड ग्रुप की कमी हो। कोविड के दौरान लिये जाने वाले भोजन के संबंध में बताया कि जिन व्यक्तियों को कोविड हुआ उनको खाने में कार्बोहाइड्रेट, कैलोरीज व प्रोसेस्ड फूड की मात्रा कम लेनी चाहिए। उनको खाने में प्रोटीन व स्वस्थ फैट अधिक लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि काली मिर्च व हल्दी का काम्बीनेशन कोविड में लाभप्रद है। लोग कोविड के दौरान बहुत काढ़ा पीते हैं यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसके कारण व्यक्तियो में गैस व एसीडिटी आदि की समस्या हो रही है। 


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