58.5 लाख के अनुमान के सापेक्ष 71.8 लाख रोजगार सृजित होने की उम्मीद

 
> कैबिनेट ने आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के तहत पंजीकरण की अंतिम तिथि 30 जून 2021 से बढ़ाकर 31 मार्च 2022 करने की मंजूरी दी।
> आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के तहत सरकार ने अग्रिम आधार पर मजदूरों को देय मजदूरी भत्ता जमा किया।

दैनिक कानपुर उजाला
नई दिल्ली।
 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए लाभार्थियों के पंजीकरण की अंतिम तिथि को और 9 महीने यानी 30 जून, 2021 से 31 मार्च, 2022 तक बढ़ाने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। इस विस्तार के परिणाम स्वरूप, औपचारिक क्षेत्र में 71.8  लाख रोजगार सृजित होने की उम्मीद है, जबकि पहले के अनुमान 58.5 लाख थे। 18.06.2021 तक, आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के तहत 79,577 प्रतिष्ठानों के माध्यम से 21.42 लाख लाभार्थियों को 902 करोड़ रुपये का लाभ दिया गया है। 31.03.2020 तक पंजीकरण की प्रस्तावित विस्तारित अवधि के व्यय सहित योजना का अनुमानित व्यय 22,098 करोड़ रुपये होगा। यह योजना कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ई.पी.एफ.ओ.) के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों / उद्योगों के नियोक्ताओं के वित्तीय बोझ को कम करने और उन्हें अधिक श्रमिकों को काम पर रखने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए लागू की जा रही है। आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के तहत, ई.पी.एफ.ओ. के साथ पंजीकृत प्रतिष्ठान और उनके नए कर्मचारी 15,000 रुपये से कम मासिक वेतन प्राप्त कर रहे हैं, लाभान्वित हो रहे हैं यदि प्रतिष्ठान नए कर्मचारियों की भर्ती करता है या जिन्होंने 01.03.2020 से 30.09.2020 के बीच अपनी नौकरी खो दी है। आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के तहत, भारत सरकार ई.पी.एफ.ओ. रजिस्टर्ड इस्टैब्लिशमेंट की ताकत के आधार पर कर्मचारियों और नियोक्ता दोनों के हिस्से' (मजदूरी का 24 %) या केवल कर्मचारियों के हिस्से (मजदूरी का 12 %) दोनों के लिए 2 साल की अवधि के लिए जमा कर रही है। विस्तृत योजना दिशा - निर्देश श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और ई.पी.एफ.ओ. की वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं। आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना को अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और पोस्ट कोविड रिकवरी चरण के दौरान औपचारिक क्षेत्र में रोजगार सृजन बढ़ाने के लिए आत्मनिर्भर  भारत 3.0 पैकेज के तहत उपायों में से एक के रूप में घोषित किया गया था। यह योजना देश की अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 महामारी के प्रभाव को कम करेगी और कम वेतन वाले श्रमिकों के सामने आने वाली कठिनाई को कम करेगी, नियोक्ताओं को व्यावसायिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने और विस्तार करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करेगी।

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