आई.आई.टी. कानपुर से एम - टेक अश्विनी वैष्णव बने रेल मंत्री

दैनिक कानपुर उजाला

जोधपुर। देश के सबसे अहम मंत्रालयों में से एक रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी जोधपुर के जन्मे पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी अश्विनी वैष्णव को दी गई है। उन्हें रेल के अलावा आई.टी. और संचार मंत्रालय का कार्यभार भी सौंपा गया है। पूर्व नौकरशाह अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को मंत्री पद की शपथ ली। यकीनन पूर्व नौकरशाह अश्विनी वैष्णव का नरेन्द्र मोदी सरकार में बतौर कैबिनेट मंत्री शामिल होना बहुत सारे लोगों को चौंका गया, हालांकि उन्होंने दो साल पहले भी ओडिशा से भाजपा के टिकट पर राज्यसभा का चुनाव जीत कर सबको सकते में डाल दिया था, क्योंकि पार्टी के पास विधायकों की संख्या इतनी नहीं थी कि वह चुनाव जीत सकें। मूलत: पाली जिले के नाडोल के पास जीवंद कलां गांव के मूल निवासी तथा हाल जोधपुर निवासी अश्विनी वैष्णव के पिता एडवोकेट दाऊलाल वैष्णव टैक्स कंसल्टेंट हैं। अश्विनी ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई जोधपुर की सेंट एंथनी स्कूल और महेश स्कूल (इंग्लिश मीडियम) से की और फिर एम.बी.एम. इंजीनियरिंग कॉलेज से आई.टी. इंजीनियरिंग में टॉपर रहे। 1986 में 11वीं बोर्ड परीक्षा में भी वे प्रदेश के टॉपर रहे थे। अश्विनी वैष्णव ने आई.आई.टी. कानपुर से एम - टेक किया। 1999 में बालासोर के कलेक्टर के रूप में उन्होंने भीषण चक्रवात से लोगों की जिंदगियां बचाकर पहली बार एक प्रशासक के रूप में अपनी योग्यता साबित की थी। 2006 में पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के निजी सचिव का पद छोड़ वे गोवा के मुरुमगांव पोर्ट ट्रस्ट के डिप्टी चेयरमैन रहे। साल 2008 में स्टडी लीव लेकर विश्व प्रसिद्ध वार्टन बिजनेस स्कूल से फाइनेंस में एम.बी.ए. की। वहां से लौटने के बाद वर्ष 2011 में सिविल सर्विसेज से त्यागपत्र देकर जी.ई. केपिटल व सीमेंस जैसी मल्टी - नेशनल कंपनी में भी मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर रहे। जोधपुर में पहले इनका निवास सरदारपुरा प्रथम ए रोड पर था। अब रातानाडा स्थित सोनी अस्पताल के पास वाली गली में उनके निवास पर आज भी नेम प्लेट लगी है। राजस्थान के जोधपुर में पैदा हुए 51 वर्षीय वैष्णव ओडिशा कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आई.ए.एस.) के अधिकारी रहे हैं। भाजपा में होने के बावजूद उन्होंने राज्यसभा चुनाव में ओडिशा के मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल के प्रमुख नवीन पटनायक का समर्थन हासिल कर लिया। बीजद के भीतर कई नेताओं ने इसकी आलोचना की थी। आरोप लगाए गए कि पटनायक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के दबाव में झुक गए और वैष्णव का समर्थन कर दिया। वैष्णव ने साल 2003 तक ओडिशा में काम किया और फिर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यालय में उप सचिव नियुक्त हो गए। वाजपेयी जब प्रधानमंत्री पद से हटे तो वैष्णव को उनका सचिव बनाया गया। आई.आई.टी. से पढ़ाई कर चुके वैष्णव ने 2008 में सरकारी नौकरी छोड़ दी और अमेरिका के व्हार्टन विश्वविद्यालय से एम.बी.ए. किया। वापस लौटने के बाद उन्होंने कुछ बड़ी कंपनियों में नौकरी की और फिर गुजरात में ऑटो उपकरण की विनिर्माण इकाइयां स्थापित कीं। इसी साल अप्रैल में उन्हें भारतीय प्रेस परिषद का सदस्य नामित किया गया था।

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